छिंदवाड़ा।


 पुंगनूर गाय को दुनिया की सबसे छोटी गाय होने का रुतबा हासिल है. खास ये है कि इस गाय को घर के भीतर ही रखा जा सकता है. कुल ढाई फीट की इस गाय की खासियत केवल इसका छोटा कद ही नहीं है बल्कि इस गाय के दूध में कई औषधीय गुण हैं. इसके दूध को स्वर्णयुक्त दूध के तौर पर जाना जाता है. यह गाय आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले के पुंगनूर शहर में पाई जाती है और इसी शहर के नाम पर इस गाय का नाम रखा गया है. जिसका प्राचीन इतिहास है. इस गाय की कीमत लाखों में तो है ही साथ ही अब यह गाय उत्तर और मध्यभारत के हिस्सो में भी पहुंच रही है.छिंदवाड़ा के चंदनगांव में बीज भंडार से जुड़े  संतोष पवार गाय और बैल का जोड़ा आंध्र प्रदेश के कन्नूर जिले से खरीद कर लाए हैं. उन्होंने बताया कि गाय और बैल का जोड़ा 2 लाख 80 हजार रुपये में मिला. शनिवार के दिन गांव पहुंचे गाय और बैल के जोड़े की खबर जैसे ही इलाके में लोगों को पता चली, लोग इन्हें देखने के लिए तब से हर दिन पहुंच रहे हैं.दुनिया की सबसे छोटी गाय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे घर के भीतर ही पपी की तरह पाल सकते हैं. आमतौर पर आजकल घर में पपी पालने का ज्यादा चलन बढ़ गया है, लेकिन उसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा होते हैं. पुंगनूर गाय घर में पालने से वास्तु शास्त्र के हिसाब से भी शुभ मानी जाती है और इसके कई फायदे भी होते हैं. सनातन धर्म के अनुसार भी गाय में देवी देवताओं का वास होता है इसलिए घर में पालने के लिए इसे शुभ माना जाता है. इनका कद छोटा महज ढाई फीट होने की वजह से यह आसानी से घर के भीतर किचन से लेकर बेडरूम तक आसानी से कहीं पर भी एडजस्ट हो जाती हैं.पशु चिकित्सक डॉक्टर जीएस पक्षबार ने बताया कि "पुंगनूर गाय की हाइट ढाई फीट तक ही होती है. यह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की प्रजाति है, जो अब धीरे-धीरे उत्तर भारत और मध्य भारत में भी लाई जा रही है. खास बात यह है कि इसके दूध में स्वर्ण पाया जाता है जो सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. इसके साथ ही पुंगनूर गाय के दूध में आठ फीसदी तक फैट पाया जाता है जबकि आमतौर पर दूसरी गायों में यह तीन से चार फीसदी होता है. इस गाय का मूत्र भी बिकता है जिसे लोग एंटी वैक्टीरियल गुण होने के कारण किसान अपने खेतों में कीटनाशक के रूप में उपयोग करते हैं".पुंगनूर गाय की प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है. कम संख्या में होने के कारण इसकी कीमत लाखों में है. पुंगनूर गाय का उल्लेख ऋृगवेद में भी मिलता है. यह गाय आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले के पुंगनूर शहर में पाई जाती है और इसी शहर के नाम पर इस गाय का नाम रखा गया है जिसका प्राचीन इतिहास है. इस गाय की कीमत एक से दस लाख रुपये के आसपास बताई जाती है.चंदनगांव में पुंगनूर गाय की देखभाल करने वाले  संतोष पवार ने  बताया कि "शिवरात्रि के दिन ही इन गायों को गांव में लाया गया है तब से ही गाय अपनी देसी गायों के साथ आसानी से सरवाइव कर रही है. किसी तरीके से कोई परेशानी नहीं है. शुरुआत में गाय करीब आधा लीटर ही दूध दे रही थी लेकिन अब डेढ़ से 2 लीटर दूध प्रतिदिन दे रही है. जब पुंगनूर गाय खरीदने पहुंचे थे तो वहां के लोगों ने बताया कि तिरुपति बालाजी में भी इन्हीं गायों के दूध का भोग लगाया जाता है. अभी धीरे-धीरे विलुप्त हो रही थी लेकिन अब इन्हें संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है.