आसाराम बापू को बड़ा झटका लगा हैं...  बता दे राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न  के मामले में सजा काट रहे आसाराम बापू  को आजीवन कारावास की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है और उन्हें तत्काल सरेंडर करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने लंबे समय से चल रही अपीलों पर सुनवाई करने के बाद यह अहम फैसला आखिरकार सुना दिया है....   और स्पष्ट कर दिया है कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी भी तरह की राहत या बदलाव का कोई आधार नहीं बनता है...  हालांकि कोर्ट ने आसाराम को गैंगरेप की धारा से बरी कर दिया है, लेकिन नाबालिग से यौन उत्पीड़न सहित अन्य गंभीर आरोपों में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा है। फिलहाल आसाराम को मेडिकल आधार पर मिली अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर थे, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें तुरंत सरेंडर करना पड़ेगा  जिससे उनके लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है....  वही अब यह पूरा मामला अगस्त 2013 का है, जब जोधपुर स्थित उनके आश्रम में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा ने आसाराम पर दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया था। मामले की जांच और ट्रायल के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद आसाराम ने इस फैसले को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अब इस पुरे मामले में हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई चली, जो 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक लगातार डे-टू-डे आधारित है....  जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी  कि पीड़िता के बयानों में विरोधाभास है और सबूत पर्याप्त नहीं हैं, जबकि अभियोजन पक्ष का कहना है कि पॉक्सो मामलों में पीड़िता का बयान ही मजबूत साक्ष्य माना जाता है और कई गवाहों पर हमले भी इस केस की गंभीरता की और दर्शाते हैं कुल मिलाकर आसाराम को गुजरात के गांधीनगर आश्रम से जुड़े एक अन्य दुष्कर्म मामले में भी जनवरी 2023 में उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, और वे लंबे समय से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर राहत की मांग कर रहे थे.....   लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले ने उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ा दी क्योंकि अब आसाराम को  एक बार फिर जेल में सरेंडर करना होगा और पूरी सजा काटनी पड़ेगी।