राजस्थान के अलवर जिले के 822 गांवों को चंबल का पानी उपलब्ध कराने वाली बहुप्रतीक्षित अलवर-भरतपुर-चंबल पेयजल परियोजना एक बार फिर अटक गयी है। जानकारी के लिए आपको बता दे की वन विभाग की एनओसी, भूमि अधिग्रहण और वित्तीय मंजूरियों में देरी के चलते परियोजना पर काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस योजना के तहत रामगढ़, बहरोड़, नीमराणा, मांढ़ण, खैरथल-तिजारा, किशनगढ़बास, हरसोली, कोटकासिम और मुंडावर सहित कई क्षेत्रों में चंबल का पानी पहुंचाया जाना है। जिले में लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ते पेयजल संकट को देखते हुए इसे स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना के लिए पुराने अलवर जिले में 122 स्थानों पर भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है, जहां उच्च जलाशय और पंप हाउस बनाए जाने हैं। हालांकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अब भी धीमी है और अधिकांश प्रस्ताव जिला प्रशासन स्तर पर लंबित हैं। अब तक केवल भिवाड़ी क्षेत्र में ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो सकी है, जबकि रामगढ़, कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा क्षेत्रों से जुड़े कई प्रस्ताव स्वीकृति अभी भी इंतजार में हैं।
परियोजना के लिए पीडब्ल्यूडी, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों से आवश्यक एनओसी मिल चुकी है, लेकिन वन विभाग की मंजूरी अब भी सबसे बड़ी बाधा की वजह बनी हुई है। राजस्व रिकॉर्ड और वन विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड में तकनीकी विसंगतियों के कारण फाइलें अभी भी अधर में अटकी हुई हैं। इसके अलावा परियोजना को वित्तीय स्तर पर भी झटका लगा है। प्री-क्वालिफिकेशन दस्तावेजों को एरिया वित्त समिति से मंजूरी नहीं मिल सकी है, जबकि एनवीटी सहित अन्य वित्तीय दायित्वों को लेकर राजस्थान जल अवसंरचना निगम से भी अंतिम सहमति नहीं मिली है। इसके चलते अब निविदा प्रक्रिया को नए सिरे से तैयार कर टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है। वही डीपीआर के मुताबिक परियोजना का काम शुरू होने के बाद इसे तीन वर्षों में पूरा किया जाना था, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर भरतपुर संभाग के नगर और डीग सहित कई इलाकों में चंबल का पानी पहुंच चुका है और वहां लोगों को राहत मिली है। ऐसे में अलवर के हजारों परिवार भी उसी राहत की उम्मीद लगाकर बैठे हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए चंबल का पानी अलवर पहुंचने का सपना फिलहाल और दूर होता जा रहा है
