प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पंचायत चुनावों में गांव की जनता बीजेपी को सबक सिखाएगी। सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को बंद कर दिया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में भारी नाराजगी है।
रविवार को अपने सरकारी आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि गरीबों, दलितों और पिछड़ों के लिए चलाई जा रही सोशल सिक्योरिटी योजनाओं को जानबूझकर खत्म किया गया है।
योजनाओं को बंद करने और जुमलों पर तीखा प्रहार
कांग्रेस शासनकाल की योजनाओं पर बोलते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि योजनाओं के नाम बदलना एक बात थी, लेकिन उन्हें पूरी तरह बंद करना समझ से परे है। गांव-गांव में ये योजनाएं बेहद लोकप्रिय थीं।
किसानों से जुड़े एक बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बात नहीं बोलनी चाहिए थी कि किसान साल में सिर्फ 20-25 दिन ही काम करता है। गहलोत ने कहा- "इसका किसानों, गरीबों और गांवों में गहरा रिएक्शन है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर हम 20-25 दिन ही काम करते हैं, तो बाकी दिन क्या करते हैं?"
निकाय चुनावों में गुंडागर्दी और सूखे के हालात पर चेतावनी
स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों में जो हुआ, वह राजस्थान के इतिहास में कभी नहीं देखा गया।
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया- "इन्होंने पूरी तरह से गुंडागर्दी की, पुलिस से छापे डलवाए और प्रशासन का खुलकर दुरुपयोग किया। ऐसी स्थिति कभी नहीं बनी थी, लोगों में भारी आक्रोश है और इसके नतीजे आज नहीं तो कल सरकार को भुगतने पड़ेंगे।"
प्रदेश में सूखे के हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने सरकार को तुरंत कदम उठाने की सलाह दी। गहलोत ने कहा कि सूखे की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सरकार को अभी से कंटिंजेंसी प्लान बनाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा को कमजोर कर दिया गया है, जिससे रोजगार की गारंटी खत्म हो गई है और अब लोगों को काम मिलने में मुश्किलें आ रही हैं।
पेयजल और चारे के प्रबंधन की मांग
आगामी समय की चुनौतियों पर बात करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि इंसानों और पशुओं दोनों के लिए पीने के पानी का पुख्ता इंतजाम करना होगा। इसके अलावा पशुओं के लिए चारे का प्रबंधन भी अभी से सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सभी व्यवस्थाओं को बेहद गंभीरता से लेना होगा, तभी इस भीषण सूखे का मुकाबला किया जा सकेगा।
