राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के एक बयान पर राज्य की राजनीति में तकरार तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राठौड़ को मीडिया के सामने सफाई देने के बजाय सीधे जनता के सामने बिना किसी शर्त के माफी मांगने की हिदायत दी है। गहलोत का कहना है कि इस तरह के बयानों से बचाव करने से स्थिति और उलझती जा रही है।
"बिना किंतु-परंतु के स्वीकार करें गलती"
जयपुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान पूर्व सीएम ने कहा कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को अपनी गलती बिना किसी लीपापोती के स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि राठौड़ को यह मानना होगा कि उन्होंने एक ऐसा बयान दिया है जो किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को नहीं देना चाहिए था।
गहलोत ने कहा कि जितना अधिक स्पष्टीकरण देने का प्रयास किया जाएगा, स्थिति उतनी ही पेचीदा होती जाएगी। जनता इस तरह के बयानों पर गहरी नजर रखती है और ऐसे मामलों में टालमटोल काम नहीं आती।
इतिहास के काले अध्यायों का दिया हवाला
भारत-पाकिस्तान के संबंधों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास संघर्ष और असहज पन्नों से भरा हुआ है, जिसे देश का नागरिक कभी भुला नहीं सकता। यही वजह है कि जब भी पड़ोसी देश का संदर्भ आता है, आम जनमानस की भावनाएं स्वाभाविक रूप से आहत होती हैं।
गहलोत ने चेताया कि जब तक इस मामले में सार्वजनिक रूप से स्पष्ट माफी नहीं मांगी जाती, तब तक सत्तारूढ़ पार्टी के लिए जनता के गुस्से को थामना आसान नहीं होगा।
क्या है पूरा विवाद और वायरल वीडियो?
यह सारा घटनाक्रम डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर राजधानी जयपुर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम से शुरू हुआ। इस आयोजन के दौरान मदन राठौड़ के भाषण का एक अंश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वायरल क्लिप के मुताबिक, मंच से यह कहते हुए सुना गया कि यदि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच टकराव होता है, तो भारत का रुख पड़ोसी होने के नाते पाकिस्तान के पक्ष में होना चाहिए। हालांकि, उसी संबोधन के अगले हिस्से में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ, तो वे पूरी तरह देश के साथ खड़े हैं। इसी बयान को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर जारी है।
