Saturday, 17 October 2026
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बाकी माता मंदिर: 1732 से निमाड़-मालवा में जल रही आस्था की लौ, नवरात्र में गूंजती हैं कई संस्कृतियों की धुनें

संक्षेप में

मध्य प्रदेश के खरगोन शहर के मध्य स्थित बाकी माता मंदिर की स्थापना सन 1732 में हुई थी। यह मंदिर नवरात्र के दौरान निमाड़ी, मालवी, गुजराती और मराठी संस्कृतियों के अनूठे संगम तथा परिसर के प्राचीन कुएं में ब्रह्ममुहूर्त स्नान की मान्यता के लिए प्रसिद्ध है।

मुख्य बातें

  • बाकी माता मंदिर की स्थापना सन 1732 में हुई थी।
  • यह मंदिर मध्य प्रदेश के खरगोन शहर के मध्य में स्थित है।
  • नवरात्र के दौरान यहां निमाड़ी, मालवी, गुजराती और मराठी परंपराओं का संगम होता है।
  • मंदिर परिसर के प्राचीन कुएं के जल से ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करने की मान्यता है।
मध्य प्रदेश
बाकी माता मंदिर: 1732 से निमाड़-मालवा में जल रही आस्था की लौ, नवरात्र में गूंजती हैं कई संस्कृतियों की धुनें

खरगोन शहर के मध्य में स्थित बाकी माता मंदिर अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए निमाड़ और मालवा अंचल में खास पहचान रखता है। करीब तीन सदी पहले स्थापित इस प्राचीन मंदिर में पुराणों में वर्णित देवशक्तियां प्राण-प्रतिष्ठित हैं, जिनके दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ कई संस्कृतियों के अनूठे मिलन के लिए जाना जाता है। हर साल नवरात्र के दौरान यहां अलग-अलग परंपराओं का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो शायद ही प्रदेश के किसी अन्य धार्मिक स्थल पर नजर आता हो।

भजनों से लेकर कालिदास रचित स्तोत्र तक

मंदिर समिति से जुड़े लोगों के मुताबिक, उत्सव के दिनों में यहां सुबह से लेकर देर रात तक अनुष्ठान चलते रहते हैं। दोपहर में श्रृंगार आरती से पहले महिलाएं निमाड़ी और मालवी लोकभाषा में पारंपरिक भजनों की प्रस्तुति देती हैं।

शाम ढलते ही सांस्कृतिक विविधता और बढ़ जाती है। रात्रि के समय महाकवि कालिदास रचित ‘महिषासुर मर्दिनी’ स्त्रोत का पाठ महिला और पुरुष मिलकर एक स्वर में करते हैं। इसके अलावा पुरुषों की टोली गुजराती भाषा में पारंपरिक गरबे गाती है, जबकि आरती मराठी भाषा में संपन्न होती है। इन अनुष्ठानों में हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, दत्त भजन और भावसार समाज द्वारा खप्पर में गाई जाने वाली विशेष गरबी भी शामिल रहती है। पर्व के दिनों में दर्शनार्थियों की भीड़ को देखते हुए मंदिर के पट रात बारह बजे तक खुले रहते हैं।

ब्रह्ममुहूर्त स्नान की प्राचीन परंपरा

मंदिर परिसर से सटा हुआ एक पुराना कुआं स्थानीय लोगों के बीच खासी आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इस कुएं के जल से स्नान करने से कई तरह की शारीरिक बीमारियों से राहत मिलती है।

इसी मान्यता के चलते नवरात्र और अन्य विशेष अवसरों पर सुबह चार बजे से नौ बजे के बीच श्रद्धालुओं की भारी कतारें लगती हैं। भक्त तड़के इसी कुएं के जल से स्नान करने के बाद माता को जल अर्पित कर अपनी मन्नतें मांगते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बाकी माता मंदिर कहाँ स्थित है और इसकी स्थापना कब हुई थी?

बाकी माता मंदिर मध्य प्रदेश के खरगोन शहर के मध्य में स्थित है। इस प्राचीन देवी मंदिर की स्थापना सन 1732 में हुई थी।

बाकी माता मंदिर नवरात्र के दौरान किस सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है?

नवरात्र के दौरान इस मंदिर में निमाड़ी, मालवी, गुजराती और मराठी संस्कृतियों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां महिलाएं निमाड़ी-मालवी भजन गाती हैं, पुरुष गुजराती गरबे और मराठी आरती करते हैं, तथा कालिदास रचित महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का सामूहिक पाठ किया जाता है।

बाकी माता मंदिर के प्राचीन कुएं से जुड़ी क्या मान्यता है?

मंदिर परिसर से लगे प्राचीन कुएं के जल से स्नान करने को लेकर मान्यता है कि इससे बीमारियों से मुक्ति मिलती है। यही वजह है कि श्रद्धालु तड़के चार से नौ बजे के बीच यहां ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर देवी की पूजा करते हैं।

नवरात्र के दिनों में बाकी माता मंदिर में दर्शन का समय क्या रहता है?

नवरात्र उत्सव के दौरान दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए बाकी माता मंदिर रात बारह बजे तक खुला रहता है।