Saturday, 17 October 2026
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भगदेई का मिनी कामाख्या धाम: रायसेन के इस प्राचीन मंदिर में विंध्याचल की तलहटी में होती है तंत्र साधना

संक्षेप में

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बरेली अनुविभाग स्थित भगदेई गांव में मां कामाख्या देवी का हजारों साल पुराना प्राचीन मंदिर है, जिसे 'मिनी कामाख्या' तांत्रिक शक्तिपीठ कहा जाता है। विंध्याचल की तलहटी में स्थित इस मंदिर में देश के कई राज्यों से संत-महात्मा और साधक साधना के लिए पहुंचते हैं।

मुख्य बातें

  • मंदिर मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बरेली अनुविभाग के भगदेई गांव में स्थित है
  • यह स्थल तांत्रिक मार्गियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है
  • वर्ष 1995 में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यहां पूजा-अर्चना की थी
  • मध्य प्रदेश के अलावा यूपी, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से संत-महात्मा यहां आते हैं
मध्य प्रदेश
भगदेई का मिनी कामाख्या धाम: रायसेन के इस प्राचीन मंदिर में विंध्याचल की तलहटी में होती है तंत्र साधना

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बरेली अनुविभाग के भगदेई गांव में स्थित मां कामाख्या देवी का प्राचीन मंदिर अपनी विशिष्ट तांत्रिक परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाना जाता है। विंध्याचल पर्वतमाला की तलहटी और तालाब के किनारे बसे इस हजारों साल पुराने मठ को 'मिनी कामाख्या' तांत्रिक शक्तिपीठ के रूप में भी पूजा जाता है।

यह स्थल केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना करने वाले मार्गियों के बीच मध्य प्रदेश का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि देवी के दर्शन मात्र से विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है।

तांत्रिक प्रतीकों से सुसज्जित प्राचीन मठ

भगदेई गांव का यह मंदिर तांत्रिक प्रतीकों से सजा हुआ है और इसकी बनावट तथा परंपराएं इसे अन्य धार्मिक स्थलों से अलग करती हैं। मंदिर से जुड़ी कई किवदंतियां और चमत्कारी कथाएं इलाके में प्रचलित हैं। स्थानीय पुजारियों और विद्वानों के अनुसार, पुराने समय में साधक इस क्षेत्र में एकांत में कठिन साधनाएं करते थे और मां के अनुग्रह से उनके मनोरथ पूरे होते थे।

इस प्राचीन देवी मठ के इतिहास से कई आध्यात्मिक हस्तियों के नाम भी जुड़े हैं। वर्ष 1995 में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भी इस मंदिर में पहुंचकर मां कामाख्या की पूजा-अर्चना की थी। हालांकि, तंत्र मार्ग की परंपराएं अति गोपनीय मानी जाती हैं, जिस वजह से यहां के अनुष्ठानों और साधना पद्धतियों के बारे में खुलकर बहुत कम जानकारी दी जाती है।

दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं संत-महात्मा

इस मंदिर की ख्याति केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों से भी संत-महात्मा और तांत्रिक मार्गि नियमित अंतराल पर भगदेई गांव पहुंचते हैं। मां के इस पावन धाम में आने वाले भक्तों का मानना है कि यहां के अनुभव सामान्य चेतना से परे और अतीन्द्रिय होते हैं, जो इस स्थान के रहस्य को और गहरा करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मां कामाख्या देवी का यह प्राचीन मंदिर कहां स्थित है?

यह प्राचीन मंदिर मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बरेली अनुविभाग के भगदेई गांव में, विंध्याचल की तलहटी और तालाब के किनारे स्थित है।

भगदेई के इस मंदिर को क्या कहा जाता है?

भगदेई के इस प्राचीन देवी मठ को 'मिनी कामाख्या' तांत्रिक शक्तिपीठ के समान माना जाता है और यह तांत्रिक मार्गियों का प्रमुख केंद्र है।

इस मंदिर में कौन सी प्रसिद्ध हस्ती आ चुकी हैं?

वर्ष 1995 में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इस मंदिर में पहुंचकर मां कामाख्या की पूजा-अर्चना की थी।

किन राज्यों से संत-महात्मा यहां दर्शन के लिए आते हैं?

मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी संत-महात्मा और साधक इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।