Monday, 5 October 2026
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CEC ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: SIR के 14 फैसलों पर जवाब तलब, सस्पेंड करने की मांग खारिज

संक्षेप में

सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े 14 फैसलों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, हालांकि उन्हें सस्पेंड करने की मांग खारिज कर दी है।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी किया है।
  • ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग अदालत ने खारिज कर दी है।
  • यह मामला स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के 14 फैसलों से जुड़ा है।
  • याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
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CEC ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस: SIR के 14 फैसलों पर जवाब तलब, सस्पेंड करने की मांग खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया है। यह याचिकाएं स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल की गई हैं, जिनमें CEC पर बिना सहमति के नीतिगत निर्णय लेने के आरोप हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि SIR से जुड़े करीब 14 ऐसे फैसलों को पलटा जाए, जो कथित तौर पर दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए थे। इसके साथ ही, CEC पर मुकदमा चलाने, वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मामलों की SIT जांच कराने और अंतिम फैसला आने तक उन्हें कामकाज से अलग रखने का आग्रह किया गया था।

संविधान के तहत CEC हटाने के प्रावधान

संविधान के आर्टिकल 324 के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट सीधे तौर पर चुनाव आयोग को सस्पेंड नहीं कर सकता। चुनाव कराने और उसकी निगरानी की जिम्मेदारी आयोग के पास है, हालांकि उसके फैसलों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। यदि कोई फैसला कानून या संविधान के दायरे से बाहर पाया जाता है, तो अदालत उसे रद्द कर सकती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया बेहद कड़े नियमों के अधीन है। आर्टिकल 324(5) के तहत CEC को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह केवल महाभियोग प्रक्रिया के जरिए ही हटाया जा सकता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को CEC की सिफारिश पर हटाया जाता है। यही वजह है कि अदालत ने फिलहाल सस्पेंशन की मांग को स्वीकार नहीं किया है।

अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई और धारा 32 का हवाला

याचिका में सिर्फ CEC ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के अन्य शीर्ष अधिकारियों पर भी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत आपराधिक मुकदमा शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इस दायरे में सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और अन्य जिम्मेदार अधिकारी शामिल हैं।

धारा 32 मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन या सुधार से जुड़े सरकारी कर्तव्यों के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान करती है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फॉर्म-6 में बिना अनुमति के बदलाव किए गए और वोटर लिस्ट के डेटाबेस को सेंट्रलाइज किया गया। इसके अलावा, ECINet सिस्टम के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल न किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। पश्चिम बंगाल में ECI के नाम पर जोड़े गए मतदाताओं को चुनौती देते हुए 16.10 लाख अपीलें दाखिल किए जाने का जिक्र भी याचिका में किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट से सामने आया था आंतरिक विवाद

इस पूरे विवाद की जड़ एक मीडिया रिपोर्ट है, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर आंतरिक मतभेदों का खुलासा हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया पर बार-बार सवाल उठाए थे।

हालाँकि SIR की देखरेख तीनों अधिकारियों को मिलकर करनी थी, लेकिन संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें से 4 आपत्तियां तो एक ही दिन में दर्ज की गईं थीं। ये आपत्तियां उन फैसलों को लेकर थीं, जिन्हें कथित तौर पर अन्य आयुक्तों की जानकारी और सहमति के बिना आगे बढ़ाया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार को क्यों नोटिस जारी किया है?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना निर्णय लेने के आरोपों पर CEC ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

क्या सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को सस्पेंड कर सकता है?

संविधान के आर्टिकल 324 के तहत सुप्रीम कोर्ट सीधे चुनाव आयोग को सस्पेंड नहीं कर सकता है। CEC को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह महाभियोग की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

याचिका में CEC के अलावा किन अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है?

याचिका में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा शुरू करने की मांग की गई है।

यह पूरा विवाद किस वजह से सामने आया था?

यह विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें खुलासा हुआ था कि अन्य चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े 14 फैसलों पर बिना सहमति के उठाए जाने पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।