छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मोरखा में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई है। इसे लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुँचे और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत सौंपी। ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों और मनरेगा के मस्टर रोल की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों में फर्जी मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर कागजों पर राशि निकाली जा रही है। इसके अलावा कपिलधारा योजना के नियमों को ताक पर रखकर शासकीय भूमि पर व्यक्तिगत लाभ के कार्य कराए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है।
सहायक सचिव पर जमीन पर कब्जे का आरोप
शिकायत लेकर पहुँचे ग्रामीणों ने पंचायत के सहायक सचिव बीरबल चंद्रवंशी पर व्यक्तिगत रूप से सरकारी जमीन पर कब्जा कर खेती करने का गंभीर आरोप भी लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर लंबे समय से नियमों की अनदेखी की जा रही है और विकास कार्यों की जमीनी हकीकत कागजों से बिल्कुल अलग है।
ग्राम पंचायत में पारदर्शिता की कमी का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि नियमानुसार नियमित अंतराल पर ग्रामसभा की बैठकें आयोजित नहीं की जातीं। इस वजह से शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुँच पाती और पात्र हितग्राही योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता पवन चंद्रवंशी ने बताया- "मनरेगा के फर्जी मस्टर रोल से लेकर सरकारी जमीन पर कब्जे तक कई गंभीर अनियमितताएं चल रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मनरेगा कार्यों की भौतिक और अभिलेखीय जांच के साथ-साथ शासकीय भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाए। जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।
