छिंदवाड़ा जिला जेल में बंद महिला बंदियों को सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक नई शुरुआत की गई है। इनर व्हील क्लब 304 की ओर से जेल परिसर में महिला बंदियों को सिलाई, कढ़ाई और मेहंदी जैसे हुनर सिखाने का बीड़ा उठाया गया है।
सप्ताह में दो दिन चलेगा प्रशिक्षण
क्लब की अध्यक्ष माही खंडेलवाल के नेतृत्व में सदस्याओं ने जिला जेल पहुंचकर महिला बंदियों से मुलाकात की और उन्हें इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की रूपरेखा समझाई। इस पहल के तहत महिलाओं को हस्तकलाओं में दक्ष किया जाएगा ताकि वे रिहाई के बाद खुद का काम शुरू कर सकें।
प्रशिक्षण को सुचारू रूप से चलाने के लिए ट्रेनर नम्रता ठाकुर सप्ताह में दो दिन जेल पहुंचेंगी। हर बार करीब दो घंटे तक वे महिला बंदियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगी। क्लास को प्रभावी बनाने के लिए क्लब की तरफ से सभी महिला बंदियों को कॉपी, पेन, पेंसिल, रबर और शार्पनर जैसी पठन-पाठन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि वे नियमित अभ्यास कर सकें।
जेल प्रशासन ने की सराहना
जेल अधीक्षक प्रतीक जैन और ज्ञानांशु भारती ने इस सामाजिक पहल का स्वागत किया है। जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह के व्यावसायिक प्रशिक्षण कैदियों के पुनर्वास में मददगार साबित होते हैं और सजा काटकर बाहर लौटने वाली महिलाओं के सामने आजीविका का संकट कम होता है।
इस दौरान इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष माही खंडेलवाल के अलावा मधु पाठक, नम्रता ठाकुर, हिना पाटनी और श्रद्धा शर्मा समेत कई सदस्याएं मौजूद रहीं। प्रशिक्षण को लेकर महिला बंदियों ने भी सकारात्मक रुचि दिखाई है।
