Sunday, 4 October 2026
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छिंदवाड़ा में बिना जुताई के चने की बुवाई: कम बारिश के बीच किसानों के लिए वरदान साबित हो रही जीरो टिलेज तकनीक

संक्षेप में

छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ विकासखंड में कम बारिश और कम नमी की चुनौती के बीच किसान जीरो टिलेज तकनीक से बिना जुताई के चने की बुवाई कर रहे हैं। BISA और CIMMYT के सहयोग से चल रहे जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत इस विधि से किसानों के समय, डीजल और जुताई की लागत में बड़ी बचत हो रही है।

मुख्य बातें

  • यह कार्यक्रम वर्ष 2024 से छिंदवाड़ा जिले में संचालित हो रहा है।
  • मध्य प्रदेश कृषि विभाग, BISA और CIMMYT इस परियोजना के संयुक्त प्रयास कर रहे हैं।
  • मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम चारगांव करबल में जीरो टिलेज से चने की बुवाई की जा रही है।
  • इस तकनीक से खेत की नमी सुरक्षित रहती है और जुताई की लागत बचती है।
मध्य प्रदेश
छिंदवाड़ा में बिना जुताई के चने की बुवाई: कम बारिश के बीच किसानों के लिए वरदान साबित हो रही जीरो टिलेज तकनीक

बदलते मौसम और मानसून की अनिश्चितता के बीच छिंदवाड़ा जिले के किसानों ने खेती का नया तरीका अपनाया है। कम बारिश के कारण खेतों में नमी कम होने और सोयाबीन की कटाई के बाद अगली फसल की बुवाई को लेकर बनी चिंता के बीच 'जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम' किसानों के लिए मददगार साबित हो रहा है।

मध्य प्रदेश सरकार के कृषि विभाग, बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) और सिमिट (CIMMYT) के संयुक्त सहयोग से यह परियोजना वर्ष 2024 से संचालित की जा रही है। इसके जरिए किसानों को कम पानी और सीमित संसाधनों में खेती करने की आधुनिक तकनीक सिखाई जा रही है।

चारगांव करबल में जीरो टिलेज तकनीक से बुवाई

मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम चारगांव करबल में किसान बिना खेत की जुताई किए सीधे चने की बुवाई कर रहे हैं। इसे जीरो टिलेज तकनीक कहा जाता है, जिसमें पारंपरिक जुताई की प्रक्रिया को पूरी तरह छोड़ दिया जाता है।

इस पद्धति में खेत में पहले से मौजूद नमी को सुरक्षित रखा जाता है। BISA की ओर से किसानों को विशेष सीडर मशीन उपलब्ध कराई गई है, जिससे बड़े रकबे में कम समय और कम लागत में बुवाई का काम पूरा किया जा रहा है।

लागत और समय की बड़ी बचत

पारंपरिक खेती में जुताई, पाटा लगाने और सिंचाई पर भारी खर्च होता है। वहीं, इस नई तकनीक से डीजल, समय और जुताई की लागत तीनों की बचत हो रही है।

BISA जबलपुर के तकनीकी विशेषज्ञ दीपेंद्र सिंह के मुताबिक, परियोजना की शुरुआत में किसानों को बिना जुताई के खेती करने के तरीके पर संदेह था। हालांकि, लगातार प्रदर्शन और क्षेत्र में किए गए प्रयोगों के बाद अब किसान इस तकनीक को खुद समझ रहे हैं और बड़े पैमाने पर अपनाने लगे हैं।

बदलते मौसम में टिकाऊ खेती का विकल्प

कम नमी वाली परिस्थितियों में यह तरीका फसल उत्पादन को सुरक्षित रखने में कारगर साबित हो रहा है। चारगांव करबल के किसानों का इस आधुनिक पद्धति की ओर रुझान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यह तकनीक जल संकट वाले इलाकों में टिकाऊ कृषि का मुख्य आधार बन सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

छिंदवाड़ा में जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम कब शुरू हुआ?

छिंदवाड़ा में यह कार्यक्रम वर्ष 2024 से मध्य प्रदेश सरकार के कृषि विभाग, BISA और CIMMYT के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

जीरो टिलेज तकनीक क्या है?

जीरो टिलेज एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें खेत की जुताई किए बिना विशेष सीडर मशीन के माध्यम से सीधे बीजों की बुवाई की जाती है, जिससे खेत की नमी सुरक्षित रहती है।

इस तकनीक से किसानों को क्या लाभ मिल रहा है?

इससे किसानों को जुताई की लागत, समय और डीजल की भारी बचत होती है तथा कम पानी व कम नमी में भी आसानी से चने की बुवाई हो जाती है।

यह कार्यक्रम छिंदवाड़ा के किस गांव में मुख्य रूप से लागू किया गया है?

यह कार्यक्रम मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम चारगांव करबल में किसानों के बीच प्रमुखता से अपनाया जा रहा है।