चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्ष के INDIA ब्लॉक के सांसदों से मुलाकात न हो पाने की वजह स्पष्ट कर दी है। सोमवार को उन्होंने बताया कि विपक्ष के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने के लिए शाम 4 से 5 बजे के बीच का समय मांगा था, जिसे अदालत ने प्रशासनिक दायरे से बाहर बताते हुए अस्वीकार कर दिया।
विपक्ष के आग्रह पर रविवार को ही पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी। CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी नागरिकों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए हमेशा खुले हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की शिकायतों का निपटारा न्यायिक प्रक्रिया के बिना संभव नहीं है।
मुलाकात ठुकराने की क्या रहीं वजहें?
CJI ने विपक्षी नेताओं को भेजे गए जवाब में चार मुख्य कारण गिनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा जाना था, उनमें SIR और CEC से जुड़े मामले शामिल हैं, जो सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही लंबित हैं।
इसके साथ ही, अदालत ने याद दिलाया कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत न्यायिक समीक्षा का अधिकार निहित है। अगर विपक्ष की तरफ से सोमवार को याचिका दायर की जाती, तो मंगलवार को पहले से लंबित मामलों के साथ ही इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कोई भी नागरिक अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है, बशर्ते निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाए।
आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालेगा विपक्ष
CJI की तरफ से मिलने के इनकार के बाद विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया है। कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के अन्य घटक दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली-मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ का नाम दिया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि इस मार्च में विपक्षी सांसदों के अलावा युवा, नागरिक संगठन और संविधान में आस्था रखने वाले लोग शामिल होंगे। यह प्रदर्शन किसी एक दल, जाति या राज्य तक सीमित न होकर सामूहिक नागरिकों का मार्च होगा।
राष्ट्रपति को ज्ञापन और खड़गे का सरकार पर हमला
इससे पहले शुक्रवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला था और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा था। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेंगलुरु में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने शनिवार के प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती और लोगों को हिरासत में लिए जाने का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के आंदोलनों से डर रही है। खड़गे ने यह भी साफ किया कि विपक्ष चीफ जस्टिस के सामने केवल अनुरोध कर सकता है, कोई आदेश नहीं दे सकता।
