भारत के प्रत्यक्ष कर संग्रह (Direct Tax Collection) में चालू वित्त वर्ष के दौरान मजबूत तेजी दर्ज की गई है। 1 अप्रैल 2026 से 14 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह कंपनियों से मिलने वाले टैक्स और शेयर बाजार से आए शेयरों के लेनदेन वाले कर (STT) में इजाफा है।
आए ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले इस बार कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत दोनों श्रेणियों में टैक्स भुगतान बेहतर रहा है।
कॉर्पोरेट टैक्स और नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स के आंकड़े
चालू वित्त वर्ष में कंपनियों से मिलने वाला शुद्ध कॉर्पोरेट टैक्स (Direct Corporate Tax) पिछले साल के मुकाबले 20.58 प्रतिशत की छलांग के साथ 5.99 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
वहीं, व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स, फर्म्स और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) से आने वाला शुद्ध नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स 5.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 6.92 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। शेयर बाजार में तेजी का असर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर भी साफ दिखाई दिया है। 14 अक्टूबर तक STT से होने वाली कमाई 52 प्रतिशत उछलकर 46,840 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
ग्रॉस टैक्स कलेक्शन और रिफंड की स्थिति
रिफंड देने से पहले का कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह यानी ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 16.03 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें कंपनियों का हिस्सा 7.53 लाख करोड़ रुपये और व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स, फर्म्स व HUF का हिस्सा 8.03 लाख करोड़ रुपये रहा है।
दूसरी ओर, सरकार ने इस अवधि के दौरान करदाताओं को टैक्स रिफंड के रूप में 2.65 लाख करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह रकम पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 24.22 प्रतिशत अधिक है। टैक्स रिफंड वह राशि होती है जो करदाता द्वारा वास्तविक कर देयता से अधिक भुगतान किए जाने पर सरकार द्वारा वापस लौटाई जाती है।
