राजस्थान सरकार खाद की कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर रोक लगाने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है आपको बता दे सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत राजसमंद और सिरोही जिलों में यूनिक फार्मर आईडी आधारित खाद वितरण का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस व्यवस्था पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों व किसानों से सुझाव और समस्यायों का भी पता लगाया जा रहा है यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
वही राज्य में वर्तमान में हर वर्ष लगभग 28 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 8 लाख मैट्रिक टन डीएपी की खपत होती है। सरकार का दावा है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि कालाबाजारी पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकती है....और रासायनिक उर्वरकों के अनियंत्रित उपयोग में भी कमी आने के संकेत है...
नई व्यवस्था के चलते पूरी खाद वितरण प्रक्रिया यूनिक फार्मर आईडी से जुड़ी होगी। किसानों को मोबाइल के माध्यम से खाद दुकान की आईडी डालकर ऑनलाइन बुकिंग करवानी अनिवार्य हो जाएगी। इसके बाद मोबाइल पर ओटीपी आएगा, जिसे दर्ज करने के बाद 48 घंटे तक मान्य कन्फर्मेशन मिलेगा। इसके बाद किसान अपनी जमीन की उपलब्धता के आधार पर पोश मशीन के जरिए खाद प्राप्त कर सकेंगे।
यह यूनिक फार्मर आईडी केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत तैयार की गई है, जिसमें किसानों की जमीन को आधार से लिंक कर एकीकृत डिजिटल पहचान बनाई गई है। इस प्रणाली का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इससे भूमि संबंधी डिजिटल डेटा सरकार के पास उपलब्ध है। यह आईडी पीएम किसान सम्मान निधि योजना से भी जुड़ी हुई है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रणाली से “जितनी आवश्यकता उतनी खाद” के सिद्धांत पर काम होगा, जिससे किसानों को जरूरत के अनुसार ही खाद उपलब्ध हो सकेगी। फिलहाल सिरोही और राजसमंद में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसकी लगातार समीक्षा की जा रही है। कम शिक्षित किसानों को थोड़ी दिक्कत आने की बात भी सामने आई है, जिस पर समाधान पर काम चल रहा है।
कृषि विभाग का कहना है की प्रोजेक्ट को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं और सरकार की इस पर कड़ी नजर है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो पूरे राजस्थान में यूनिक फार्मर आईडी आधारित खाद वितरण प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे कालाबाजारी पर रोक लगेगी और खाद की कमी की समस्या भी काफी हद तक खत्म होने की संभावना है...
