Saturday, 3 October 2026
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ग्वालियर की बेटी इशिका चौधरी का कमाल: 44 साल बाद एशियन गेम्स में भारत को दिलाया महिला हॉकी गोल्ड

संक्षेप में

जापानी मैदानों पर एशियन गेम्स के फाइनल में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद गोल्ड मेडल जीता है। ग्वालियर की बेटी इशिका चौधरी इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थीं।

मुख्य बातें

  • भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में चीन को 1-0 से हराया
  • भारत ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में महिला हॉकी का गोल्ड जीता
  • ग्वालियर की इशिका चौधरी स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा थीं
  • मैच का एकमात्र निर्णायक गोल लालरेमसियामी ने किया
  • इशिका ने अपने खेल करियर की शुरुआत ग्वालियर के दर्पण मिनी हॉकी स्टेडियम से की थी
मध्य प्रदेश
ग्वालियर की बेटी इशिका चौधरी का कमाल: 44 साल बाद एशियन गेम्स में भारत को दिलाया महिला हॉकी गोल्ड

जापान में खेले गए एशियन गेम्स के खिताबी मुकाबले में भारतीय महिला हॉकी टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। फाइनल मैच में भारत ने चीन को 1-0 से मात दी। इस रोमांचक जीत के साथ ही देश ने चार दशक से अधिक यानी 44 साल के लंबे इंतजार के बाद महिला हॉकी में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जीत का अहम हिस्सा रहीं ग्वालियर की बेटी इशिका चौधरी, जिनकी इस कामयाबी पर उनके गृह नगर में जश्न का माहौल है।

11 साल की उम्र में थामी थी हॉकी स्टिक

इशिका के परिवार के मुताबिक, बेटी की प्रतिभा बचपन से ही साफ झलक रही थी। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने हॉकी स्टिक थाम ली थी। शहर के दर्पण मिनी हॉकी स्टेडियम से उनके खेल सफर की शुरुआत हुई थी, जहां उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया। जिस मैदान पर इशिका ने खेल की शुरुआती बारीकियां सीखीं, वहां उनके पहले कोच भी इस सफलता से बेहद गदगद हैं। जिस बच्ची को उन्होंने स्टिक पकड़ना सिखाया, आज वही खिलाड़ी देश की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहरा रही है।

फाइनल में लालरेमसियामी का एकमात्र गोल निर्णायक

टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में भारत और चीन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल लालरेमसियामी ने किया, जिसके दम पर टीम इंडिया ने चीन को 1-0 से हराकर पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। भारतीय महिला हॉकी टीम ने इससे पहले आखिरी बार 1982 में दक्षिण कोरिया को हराकर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार जापान के मैदान पर मिली यह जीत भारतीय हॉकी के इतिहास में एक नया अध्याय लिख गई है।

परिवार और कोच में जश्न का माहौल

ग्वालियर के खेल प्रेमियों और परिवार के लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं है। इशिका की इस उपलब्धि के बाद से उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि बेटी ने न सिर्फ ग्वालियर बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। स्थानीय खेल हलकों में भी इसे ग्वालियर की 'हॉकी नर्सरी' की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एशियन गेम्स 2023/हालिया में भारतीय महिला हॉकी टीम ने किसे हराया?

भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल मुकाबले में चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।

इशिका चौधरी किस शहर से ताल्लुक रखती हैं?

इशिका चौधरी मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर की रहने वाली हैं और स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं।

भारत ने इससे पहले महिला हॉकी में एशियन गेम्स का गोल्ड कब जीता था?

भारत ने इससे पहले 44 साल पहले 1982 में दक्षिण कोरिया को हराकर एशियन गेम्स में महिला हॉकी का गोल्ड मेडल जीता था।

फाइनल मैच में एकमात्र गोल किसने किया था?

भारत के लिए खिताबी मुकाबले का एकमात्र और निर्णायक गोल लालरेमसियामी ने किया था।