जापान में खेले गए एशियन गेम्स के खिताबी मुकाबले में भारतीय महिला हॉकी टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। फाइनल मैच में भारत ने चीन को 1-0 से मात दी। इस रोमांचक जीत के साथ ही देश ने चार दशक से अधिक यानी 44 साल के लंबे इंतजार के बाद महिला हॉकी में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जीत का अहम हिस्सा रहीं ग्वालियर की बेटी इशिका चौधरी, जिनकी इस कामयाबी पर उनके गृह नगर में जश्न का माहौल है।
11 साल की उम्र में थामी थी हॉकी स्टिक
इशिका के परिवार के मुताबिक, बेटी की प्रतिभा बचपन से ही साफ झलक रही थी। महज 11 साल की उम्र में उन्होंने हॉकी स्टिक थाम ली थी। शहर के दर्पण मिनी हॉकी स्टेडियम से उनके खेल सफर की शुरुआत हुई थी, जहां उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया। जिस मैदान पर इशिका ने खेल की शुरुआती बारीकियां सीखीं, वहां उनके पहले कोच भी इस सफलता से बेहद गदगद हैं। जिस बच्ची को उन्होंने स्टिक पकड़ना सिखाया, आज वही खिलाड़ी देश की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहरा रही है।
फाइनल में लालरेमसियामी का एकमात्र गोल निर्णायक
टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में भारत और चीन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल लालरेमसियामी ने किया, जिसके दम पर टीम इंडिया ने चीन को 1-0 से हराकर पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया। भारतीय महिला हॉकी टीम ने इससे पहले आखिरी बार 1982 में दक्षिण कोरिया को हराकर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार जापान के मैदान पर मिली यह जीत भारतीय हॉकी के इतिहास में एक नया अध्याय लिख गई है।
परिवार और कोच में जश्न का माहौल
ग्वालियर के खेल प्रेमियों और परिवार के लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं है। इशिका की इस उपलब्धि के बाद से उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि बेटी ने न सिर्फ ग्वालियर बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। स्थानीय खेल हलकों में भी इसे ग्वालियर की 'हॉकी नर्सरी' की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
