भारत की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक बनाने के लिए लैस बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी फैसला लिया है। सरहद पार से ड्रोन के जरिए होने वाली नशीले पदार्थों, हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 'स्मार्ट बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड' लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। वही इस नई सुरक्षा व्यवस्था में एंटी-ड्रोन शील्ड, स्मार्ट फेंसिंग, अत्याधुनिक सेंसर, डिजिटल निगरानी तंत्र और रियल टाइम इंटेलिजेंस नेटवर्क जैसी तकनीके हे जिससे सीमा पर होने वाली हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सके। हाल के वर्षों में पंजाब समेत कई सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए हथियारों और ड्रग्स की तस्करी के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने के साथ-साथ सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया क्षमता को भी मजबूत करने वाली साबित होगी इस हाईटेक सुरक्षा ढांचे के साथ गृह मंत्री अमित साह के द्वारा लॉन्च किया गया लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम यानी की एलपीएमएस को भी इसके साथ जोड़ा जाएगा। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म सीमाओं पर कार्गो प्रोसेसिंग और यात्रियों की आवाजाही को पूरी तरह डिजिटल और अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करेगा। सरकार के मुताबिक एलपीएमएस सभी संबंधित एजेंसियों, विभागों और डेटा सिस्टम को एक मंच पर लाकर काम करेगा, जिससे सूचना साझा करने और समन्वय की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। इससे कागजी कामकाज में भारी कमी आएगी, सीमा चौकियों पर वाहनों की लंबी कतारें कम होंगी और कार्गो ट्रकों की प्रोसेसिंग तेज हो पाएगी वही गृह मंत्रालय के मुताबिक स्मार्ट बॉर्डर' का यह कॉन्सेप्ट आने वाले समय में देश की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है। जहां एक ओर यह ड्रोन तस्करी, घुसपैठ और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर व्यापार, पर्यटन और सीमा पार वैध गतिविधियों को भी अधिक सुगम बनाएगा। सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाली इस नई पहल को भारत की सीमा प्रबंधन प्रणाली में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में देश की आर्थिक और भौतिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने का आधार बनने में मदद करेगा।
