करीब तीन महीने चली जंग से भारी भरकम नुकसान के बावजूद ईरान विजेता की तरह नजर आ रहा है ...इस युद्दध में सर्वोच्च नेता समेत 40 शीर्ष कमांडर इस युद्ध में ईरान ने खो दिये....इसके साथ ही अर्थव्यवस्था को लगभग 30 लाख करोड से अधिक का नुकसान झेलना पडा....और युद्ध की शुरुआत में पूरी दुनिया मानकर चल रही थी...कि शीर्ष नेतृत्व के खात्मे के बाद ईरान धाराशाही हो जाएगा...बावजूद इसके6 हजार से अधिक मिसाइले..और ड्रोग दागकर इसकी वार मशीन ने अमेरिका सहित सभी महाशक्तियों को ईरान ने चौंका दिया....बडे बडे झटकों के बावजूद ईरान की राज्य व्यवस्था,प्रतिरोध क्षमता,और रणनीतिक प्रभाव बरकरार रहा है ....यही कारण है कि विशेषज्ञ इस संघर्ष को केवल सैन्य जीत हार के पैमाने पर नही देख रहे है ....ईरान को भारी नुकसान जरुर हुआ है ...लेकिन विरोधियों का मुख्य लक्ष्य उसकी राजनीतिक व्यवस्था,प्रतिरोध क्षमता और क्षेत्रीय भूमिका को निर्णायक रुप से समाप्त करना पूरा नही हो सका.....इसी आधार पर ईरान को सैन्य हार के बावजूद रणनीति बढत हासिल करने वाले देश के रुप में देखा जा रहा है ...नतीज ये हुआ है कि 1979की इस्लामी क्रांति के बाद शायद पहली बार ईरान वैश्विक शक्ति संतुलन की बहस के केंद्र मे आ गया है .....वही ट्रंप द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध से नए वर्ल्ड ऑर्डर की शुरुआत हो गई है ...ट्रंप पर ईरान को वेनेजुएला समझने की भारी भूल पडी है....जीत के बाद अब ईरान खाडी का नया बॉस बन गया है ..आपको बता दे ईरान पर 1979 के बाद से चल रहा वनवास खत्म हो गया है ....क्रूड आयल बेचने और अन्य निर्यातों पर से प्रतिबंध हट गए है ....इसके साथ ही विदेशों में ईरान की संपति भी डीफ्रीज होगी...इसके अलावा ईरान को खाडी देशों से पुननिर्माण के लिए 28 लाख करोड रुपए मिलेंगे....जबकि ईरान ने सबसे ज्यादा नुकसान सऊदी अरब,यूएई,कतर,और कुवैत को ही पहुंचाया था...डील के स्थायी होने के लिए 60 दिन का समय है ....और ईरान के हाथ में चाबी रहने वाली है ...ट्रंप भले ही धमकियां दे लेकिन अब हमला नहीं करेगे...ईरान की सीधी रणनीति और जवाबी कार्यवाही ने सीधे तौर पर ट्रंप और नेतन्याहू को झुकाने पर मजबूर कर दिया ...जिसके चलते अब ट्रंप ही खुलकर इस जंग को रोकने के समर्थन में आ गए है और डील भी साइन कर दी है...लेकिन सबसे बडी बात ये है कि इस डील के बाद ट्रंप को अपने देश में ही मुंह की खानी पड रही है ....एक तरफ उनके पार्टी के ही सांसद उनको घेर रहे है ...दूसरी तरफ इजरायल भी अब अमेरिका को आंखें दिखा रहा है ...ऐसे में ये तो साफ हो गया कि लाखों डॉलर उडाकर ईरान को धाराशाही करने के मंसूबों के साथ मैदान में उतरे ट्रंप को ये तो समझ आ गया कि ईरान की इच्छाशक्ति ने सुपरपावर को भी घुटने पर ला दिया है ..भले ही नुकसान ईरान का ज्यादा हुआ हो ...लेकिन इस युद्द का असली विजेता केवल और केवल ईरान ही है.....जंग भले ही खत्म हो गई हो ...लेकिन अब नया खाडी का बॉस ईरान है...ईरान ही अब इस पूरे क्षेत्र में आंख दिखाकर अपनी बात मनवाने की हिम्मत रखता है ...ईरान ने जो किया है शायद ही किसी खाडी देश ने अब तक किया हो....क्योकि अमेरिका को घुटनों पर लाकर ईरान ने ये तो बता दिया कि उनकी इच्छाशक्ति और जवाब देने की रणनीति ने अच्छे अच्छों को ठिकाने लगा दिया है ...
