जयपुर के रामबाग स्थित एस. एस. जैन सुबोध स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को 'शब्द शक्ति संगम' का भव्य आयोजन हुआ। 'शब्द रसायन' संस्थान की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के तीन अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वाली नारी शक्तियों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान खेल, रक्षा और समाजशास्त्र से जुड़ी हस्तियों ने अपने जीवन के संघर्ष और उपलब्धियों को साझा करते हुए युवाओं को राष्ट्र सेवा और भारतीय संस्कृति के संस्कारों से जुड़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और अतिथि सत्कार के साथ हुई, जिसके बाद कॉलेज प्राचार्य डॉ. रेणु जोशी ने स्वागत भाषण दिया। संस्थान के निदेशक डॉ. रेवंत दान ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि मौजूदा दौर में युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा के वैचारिक संस्कारों को अपनाने की सबसे अधिक जरूरत है। वहीं, मानद सचिव मुरारी गुप्ता ने इस अवसर पर आयोजित 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते' विषयक पोस्टर प्रतियोगिता की रूपरेखा पर जानकारी दी।
बचपन की बीमारी को मात देकर बनीं स्क्वैश कोच
अंतरराष्ट्रीय स्क्वैश खिलाड़ी और भारतीय कोच सुरभि मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि हर इंसान के भीतर ईश्वर प्रदत्त नैसर्गिक गुण छिपे होते हैं, बस उन्हें पहचानने और जीवन में उतारने की जरूरत है। उन्होंने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि बचपन में उन्हें अस्थमा की गंभीर समस्या थी, लेकिन खेल के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे तीव्रतम खेलों में शुमार स्क्वैश में रुचि होने के कारण उन्होंने तमाम शारीरिक बाधाओं को दरकिनार किया और इसी क्षेत्र को अपना करियर बनाया। सुरभि ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने पैशन को जिंदा रखें और लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
नौसेना में असाधारण सफर और समाजशास्त्र के सबक
भारत की पहली महिला आई.एन.एस. विक्रमादित्य कमांडर प्रियंका चौधरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से होने के बावजूद जब उन्होंने जल सेना जैसा चुनौतीपूर्ण क्षेत्र चुना, तो शुरुआत में हर कोई हैरान था। हालांकि, इस कठिन क्षेत्र में चयनित होने के बाद उन्होंने देश की समुद्री सीमाओं पर कई साहसिक अभियानों में अहम भूमिका निभाई।
दूसरी ओर, प्रसिद्ध समाजशास्त्री और स्तंभकार प्रो. ऋतु सारस्ウェत ने देश की सामाजिक स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि आज का भारत पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है, लेकिन राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा आयातित विचारों से देश की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को लगातार चुनौती मिल रही है।
परिवार की प्राचीन व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रो. सारस्वत ने कहा कि स्त्री और समाज दोनों परिवार के अपरिहार्य स्तंभ हैं। उन्होंने पुरुष को आकाश और स्त्री को धरती की संज्ञा दी और बताया कि दोनों के आपसी सहयोग से ही समाज और राष्ट्र की वास्तविक प्रगति संभव है।
पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित और समापन
मुख्य सत्र के समापन से पहले 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंته' विषय पर हुई पोस्टर प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। इस पूरे आयोजन का संचालन कशिश गौड़ ने किया, जबकि अंत में डॉ. विशाल गौतम ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अजमेर और जयपुर समेत प्रदेशभर के शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े इस वैचारिक मंथन में युवाओं ने भारी उत्साह दिखाया।
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