कोटा में चल रहे 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले के तहत श्रीराम रंगमंच पर रविवार को अवकाश का दिन होने के कारण दर्शकों का भारी जनसैलाब उमड़ा। छुट्टी का दिन होने से रामलीला प्रांगण खचाखच भरा नजर आया और हर उम्र के लोगों ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का आनंद लिया। इस दौरान राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में महापौर अनुसुईया गोस्वामी, महिला नागरिक सहकारी बैंक की अध्यक्ष मंजू निराला और अन्य अतिथियों ने राम, जानकी और लक्ष्मण के स्वरूपों के साथ श्रीरामचरितमानस का पूजन किया। इसके बाद पार्षद ओमप्रकाश काबरा, सीमा चौधरी, प्रमिला वर्मा और अन्य अतिथियों ने आरती में हिस्सा लिया।
सुग्रीव मिलन और बाली वध का मंचन
राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने राम और सुग्रीव की मैत्री प्रसंग से मंचन की शुरुआत की। कलाकारों के जीवंत अभिनय और संवाद अदायगी ने दर्शकों को बांधे रखा। इसके बाद राम द्वारा बाली वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसे अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस प्रसंग के मंचन के साथ ही पूरा प्रांगण "जय श्री राम" के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों ने मित्रता, धर्म और नीति के संदेश को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों के सामने रखा।
सुंदरकांड की चौपाइयों पर गूंजा प्रांगण
लीला के अगले चरण में हनुमान चरित्र और सुंदरकांड का भव्य मंचन किया गया। पवनपुत्र हनुमान के लंका प्रस्थान, सीता माता की खोज और अशोक वाटिका के दृश्यों को रामचरितमानस की चौपाइयों के जरिए जीवंत किया गया। शास्त्रीय और लोक धुनों पर आधारित इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई।
मेला समिति की ओर से दर्शकों के बैठने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। महापौर अनुसूईया गोस्वामी ने कहा कि रामलीला आज भी हमारी संस्कृति और आस्था का मजबूत आधार है। हर दृश्य के पूरा होने पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
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