मंदसौर पुलिस की साइबर सेल ने 11 करोड़ रुपए से अधिक के ठगी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में इस गिरोह के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े होने का खुलासा हुआ है। गिरोह का सरगना ठगी की इस रकम को क्रिप्टो करेंसी के जरिए पाकिस्तान भेज रहा था और वहीं से उसे पूरे नेटवर्क को चलाने के निर्देश मिल रहे थे।
पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश
मंगलवार को मंदसौर पुलिस ने बिहार के रहने वाले 6 आरोपियों को इस ठगी नेटवर्क के सिलसिले में पकड़ा था। इसके बाद हुई पूछताछ में मास्टरमाइंड टोनी ने पुलिस को बताया कि उसे साइबर ठगी रैकेट चलाने के निर्देश पाकिस्तान में बैठे एक व्यक्ति से मिल रहे थे।
रतलाम रेंज के डीआईजी निमिष अग्रवाल ने बताया- "सरगना टोनी का दावा है कि वह खुद पाकिस्तान के इसी नेटवर्क के संपर्क में ठगी का शिकार होने के बाद आया था।"
टोनी के मुताबिक, जब उसने ठगे गए रुपए वापस मांगे तो पाकिस्तान के ऑपरेटिव्स ने उसे अपने लिए काम करने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, पुलिस इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है और इसे अभी शुरुआती बयान ही मान रही है।
क्रिप्टो करेंसी के जरिए विदेशों में फंडिंग
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निशाना बनाकर ठगी करता था। ठगी से मिलने वाली पूरी रकम को पारंपरिक बैंकिंग चैनलों के बजाय क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से पाकिस्तान ट्रांसफर किया जाता था।
इस खुलासे के बाद स्थानीय पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क को खंगालने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों के संपर्क में है। मामले में वित्तीय लेनदेन के डिजिटल ट्रेल और अन्य सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
