Friday, 2 October 2026
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मोहन भागवत बोले- भारत में धर्म और राष्ट्र अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर; दुनिया की हर समस्या का समाधान भारत के पास

संक्षेप में

मुंबई में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में धर्म और राष्ट्र अलग नहीं हैं, बल्कि दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया की हर समस्या का समाधान भारत के पास मौजूद विशाल ज्ञान परंपरा से मिल सकता है।

मुख्य बातें

  • मोहन भागवत ने मुंबई में ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें सम्मेलन को संबोधित किया।
  • उन्होंने कहा कि राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखता है।
  • भारत के पास वेद, उपनिषद, गीता और गुरु ग्रंथ साहिब जैसी विशाल ज्ञान परंपरा है।
देश विदेश
मोहन भागवत बोले- भारत में धर्म और राष्ट्र अलग नहीं, दोनों एक-दूसरे पर निर्भर; दुनिया की हर समस्या का समाधान भारत के पास

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि देश में धर्म और राष्ट्र एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। मुंबई में आयोजित ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप के 14वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।

भागवत ने कहा कि राष्ट्र का उद्देश्य ही धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखता है। दोनों पूरी तरह से एक-दूसरे पर निर्भर हैं। यदि इनमें से एक का अस्तित्व समाप्त होता है, तो दूसरा भी सुरक्षित नहीं रह सकता।

दुनिया खोज रही है संतुलन

संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा समय में दुनिया विकास और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन तलाश रही है। इसके साथ ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक जीवन के बीच भी सामंजस्य बिठाने की कोशिश चल रही है।

भागवत के मुताबिक, भारत ने इतिहास में कभी किसी दूसरे देश पर कब्जा करने की कोशिश नहीं की और न ही लोगों का धर्म बदलने का प्रयास किया। इसके बावजूद देश ने अपना ज्ञान हमेशा दुनिया के साथ साझा किया है। आज वैश्विक स्तर पर यह माना जा रहा है कि हर समस्या का समाधान भारत से ही निकलेगा।

ज्ञान परंपरा और भक्ति की शक्ति

भारत के पास वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और गीता जैसी विशाल ज्ञान परंपरा मौजूद है। इस परंपरा में जैन आगम, त्रिपिटक, गुरु ग्रंथ साहिब और देश के संतों की शिक्षाएं भी शामिल हैं।

भागवत ने कहा कि देश के पास ज्ञान का ऐसा भंडार है जिसकी आज पूरी दुनिया को आवश्यकता है। भक्ति की शक्ति के माध्यम से सीधे ईश्वर के करीब पहुंचा जा सकता है।

मानवता के भविष्य की रक्षा

ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने वाले लोगों के जीवन और उनकी परंपराओं को बचाना सिर्फ एक धार्मिक जिम्मेदारी नहीं है। इसे मानवता की सेवा बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा करने से केवल एक जीवन की रक्षा नहीं होती, बल्कि पूरी मानव जाति के सुरक्षित भविष्य की नींव मजबूत होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मोहन भागवत ने धर्म और राष्ट्र को लेकर क्या कहा?

मोहन भागवत ने कहा कि भारत में धर्म और राष्ट्र अलग नहीं हैं। राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखता है। दोनों एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर हैं।

यह सम्मेलन कहाँ आयोजित किया गया था?

यह ऑल इंडिया विहार सेवा ग्रुप का 14 वां सम्मेलन था, जो मुंबई में आयोजित किया गया था।

भारत की ज्ञान परंपरा में क्या-क्या शामिल है?

भारत की ज्ञान परंपरा में वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, जैन आगम, त्रिपिटक, गुरु ग्रंथ साहिब और संतों की शिक्षाएं शामिल हैं।

दुनिया की समस्याओं को लेकर संघ प्रमुख का क्या रुख था?

मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया विकास, पर्यावरण सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन खोज रही है और हर समस्या का समाधान भारत से निकलेगा।