जापान के नागोया में चल रहे पैरा एशियन गेम्स के पहले दिन सोमवार को भारतीय निशानेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 स्पर्धा में राजस्थान की दो बेटियों ने देश का नाम रोशन किया। सीकर की मोना अग्रवाल ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि दो बार की पैरालंपिक चैंपियन अवनी लेखरा ने रजत पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में 'वन-टू फिनिश' करते हुए पोडियम के शीर्ष दो स्थानों पर कब्जा किया।
अंतिम शॉट तक चला कड़ा मुकाबला
स्पर्धा का रोमांच आखिरी पल तक बना रहा। फाइनल मुकाबले के अंतिम शॉट से ठीक पहले मोना 239.2 अंकों के साथ अवनी से महज 0.1 अंक आगे थीं। आखिरी शॉट में मोना ने 250.0 का रिकॉर्ड स्कोर बनाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं, अवनी लेखरा ने 249.6 अंक हासिल कर रजत पदक जीता। एसएच 1 श्रेणी उन निशानेबाजों के लिए होती है जिनके निचले अंगों में विकलांगता होती है। इस वर्ग में दोनों भारतीय एथलीटों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली।
संघर्ष को ताकत बनाकर तय किया सफर
राजस्थान के सीकर में 8 नवंबर 1987 को जन्मी मोना अग्रवाल ने जीवन के शुरुआती दौर से ही शारीरिक चुनौतियों का सामना किया है। महज नौ महीने की उम्र में पोलियो की वजह से उनके दोनों पैर प्रभावित हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने खेलों से नाता नहीं तोड़ा। निशानेबाजी में आने से पहले मोना ने पैरा-एथलेटिक्स, पैरा-पावरलिफ्टिंग और सिटिंग वॉलीबॉल में हाथ आजमाया।
उन्होंने साल 2019 की पहली नेशनल सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में राजस्थान महिला टीम की कप्तानी करते हुए स्वर्ण पदक दिलाया था। अलग-अलग खेलों में अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने साल 2021 के दिसंबर में राइफल शूटिंग को अपना मुख्य करियर चुना। विवाह के बाद वर्तमान में वह जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में रहती हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रहा कद
निशानेबाजी में कदम रखने के बाद मोना ने तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं। उन्होंने 2022 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छाप छोड़ी। साल 2023 में क्रोएशिया के ओसिजेक में हुए वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट वर्ल्ड कप के मिक्स्ड टीम इवेंट में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
इसी वर्ष दक्षिण कोरिया के चांगवोन में आयोजित वर्ल्ड कप की महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच 1 स्पर्धा में मोना ने स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2024 के पेरिस पैरालंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपनी क्षमता का लोहा मनवाया था। नागोया में मिला यह स्वर्ण पदक उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि है।
