प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों की आजीविका का मजबूत जरिया बन रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में इस योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक और वित्तीय संबल से जोड़ने वाली इस योजना के तहत राज्य में अब तक 2 लाख 30 हजार से अधिक कारीगरों का पंजीकरण हो चुका है, जिसके साथ राजस्थान इस सूची में देश में चौथे पायदान पर है।
प्रशिक्षण और ऋण वितरण में तेजी
योजना के तहत कारीगरों को उनके हुनर को निखारने के लिए बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर अपने काम की गुणवत्ता बढ़ा सकें। राजस्थान में अब तक 2 लाख 22 हजार 473 लाभार्थियों का बेसिक प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। ट्रेडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बढ़ई श्रेणी में सबसे अधिक 45 हजार 958 और राजमिस्त्री श्रेणी में 38 हजार 450 कारीगरों ने पंजीकरण कराया है।
शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए योजना के तहत रियायती ब्याज दरों पर अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा टूलकिट खरीदने के लिए 15 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। राजस्थान में अब तक 62 हजार से ज्यादा ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। साथ ही, आधुनिक उपकरण खरीदने और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए पात्र कारीगरों को 2 लाख 17 हजार 84 ई-वाउचर जारी किए गए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर तय समय से पहले लक्ष्य पूरा
केंद्र सरकार ने देशभर में वर्ष 2028 तक 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे तय समय सीमा से काफी पहले ही पूरा कर लिया गया है। 30 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में 30 लाख 3 हजार 925 कारीगर पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 24.39 लाख से अधिक का बेसिक प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 5 हजार 350 करोड़ रुपये के 6.23 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत हुए हैं और 26.17 लाख से ज्यादा टूलकिट ई-वाउचर बांटे जा चुके हैं। आईआईएम मुंबई द्वारा किए गए एक समवर्ती मूल्यांकन में सामने आया है कि इस योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वाले 93 प्रतिशत लाभार्थियों की आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
