राजस्थान आवासन मंडल ने त्योहारी सीजन से पहले आम लोगों के लिए नई आवासीय योजनाओं का पिटारा खोल दिया है। मंडल की ओर से जयपुर, किशनगढ़ और भिवाड़ी में कुल 649 फ्लैटों और आवासों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 17 अक्टूबर से शुरू की जाएगी। इसके लिए इच्छुक आवेदक 16 नवंबर तक अपना पंजीकरण करा सकेंगे। इस अभियान के तहत जयपुर के इंदिरा गांधी नगर से लेकर भिवाड़ी और किशनगढ़ तक के खरीदारों को घर खरीदने का मौका मिलेगा।
पंजीकरण की शुरुआत के साथ ही मंडल प्रताप नगर में 'ग्रीनवुड होराइजन' परियोजना का शिलान्यास भी करेगा। इस दौरान सेक्टर-5 और 6 में नवनिर्मित सामुदायिक केंद्रों का लोकार्पण भी संपन्न कराया जाएगा, जिससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
जयपुर से भिवाड़ी तक योजनाओं का ब्योरा और कीमतें
इन नई योजनाओं के तहत विभिन्न आय वर्ग के लोगों के लिए मकानों और फ्लैटों की कीमतें तय की गई हैं। जयपुर के इंदिरा गांधी नगर में स्वीकृत पत्रकारों के लिए मध्यम आय वर्ग-ब (MIG-B) श्रेणी के 144 तीन बेडरूम वाले फ्लैटों की योजना लाई जा रही है। इन फ्लैटों की अनुमानित कीमत 74.68 लाख रुपये रखी गई है।
किशनगढ़ के खोड़ा गणेश रोड स्थित फेज-चतुर्थ योजना में कुल 90 स्वतंत्र आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें मध्यम आय वर्ग-अ (MIG-A) के 26, मध्यम आय वर्ग-ब (MIG-B) के 40 और उच्च आय वर्ग (HIG) के 24 मकान शामिल हैं। इन आवासों की कीमत 40 लाख रुपये से शुरू होकर 68.50 लाख रुपये तक तय की गई है।
प्रताप नगर के सेक्टर-28 में स्थित 'ग्रीनवुड होराइजन' योजना के तहत पहले चरण के पंजीकरण के बाद अब शेष 146 फ्लैटों के लिए आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। इन प्रीमियम फ्लैटों का मूल्य 73.80 लाख रुपये से 1.05 करोड़ रुपये के बीच रहेगा। वहीं, भिवाड़ी की अरावली विहार योजना के अंतर्गत 77 फ्लैट उपलब्ध होंगे, जिनकी कीमत 38.50 लाख से 63.35 लाख रुपये के बीच निर्धारित की गई है।
शॉपिंग आर्केड और बुनियादी सुविधाएं
आवासन बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए मंडल ने प्रताप नगर में 336 फ्लैटों और 354 दुकानों वाले एक बड़े शॉपिंग आर्केड के निर्माण का फैसला किया है। इस कमर्शियल और रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए मंडल ने 288.27 करोड़ रुपये की निविदा को मंजूरी दी है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी नई और पुरानी आवासीय योजनाओं में बिजली, जलापूर्ति और पक्की सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह विकसित रखी गई हैं, ताकि आवंटियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
