Friday, 9 October 2026
अभी का दौर

राजस्थान में होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर: गंभीर रोगियों को घर पर मिल रहा इलाज, सवा साल में 3 लाख से ज्यादा मरीज लाभान्वित

संक्षेप में

राजस्थान सरकार की होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर पहल के तहत गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों और बेड-रिडन बुजुर्गों को घर बैठे चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं। पिछले सवा साल में इस योजना से 3 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं।

मुख्य बातें

  • सवा साल में तीन लाख से अधिक गंभीर रोगियों को पेलिएटिव केयर का लाभ मिला है।
  • अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 के बीच ओपीडी में 2.51 लाख और आईपीडी में 41 हजार से अधिक मरीजों को उपचार दिया गया।
  • जुलाई 2025 से अब तक 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड केयर दी गई है, जिनमें 20 हजार बुजुर्ग शामिल हैं।
  • प्रदेश में अब तक लगभग 57 हजार केयर गिवर्स को पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
आपणो राजस्थान
राजस्थान में होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर: गंभीर रोगियों को घर पर मिल रहा इलाज, सवा साल में 3 लाख से ज्यादा मरीज लाभान्वित

असाध्य और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और बेड-रिडन बुजुर्गों के लिए अस्पताल की लंबी दूरियां तय करना अब मजबूरी नहीं रहा है। राजस्थान सरकार की होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर पहल के जरिए पिछले सवा साल में तीन लाख से अधिक मरीजों को उनके घर की चौखट पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीजों को दर्द से राहत, मानसिक संबल और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना है।

कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित रोगियों को अस्पताल आने-जाने की परेशानी से बचाने के लिए चिकित्सा विभाग ने इस सेवा का दायरा तेजी से बढ़ाया है। प्रदेश के 98 जिला, उप जिला और सेटेलाइट अस्पतालों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक काम कर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 के बीच ओपीडी में 2 लाख 51 हजार से ज्यादा मरीजों को उपचार दिया गया, जबकि इसी अवधि में 41 हजार से अधिक गंभीर रोगियों को आईपीडी में भर्ती कर देखभाल प्रदान की गई। इसके अलावा टेली-कंसल्टेशन के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह भी मरीजों को आसानी से मिल रही है।

‘राहत की किरण’ वाहन से घर-घर पहुंच रही मेडिकल टीम

बेड-रिडन मरीजों और बुजुर्गों तक चिकित्सा सुविधा सीधे पहुंचाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहनों का संचालन किया जा रहा है। इन वाहनों के जरिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम सीधे मरीजों के घर पहुंचती है।

इस विशेष होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के तहत जुलाई 2025 से अब तक 43 हजार मरीजों को घर पर ही नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, दवाइयां और मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जा चुका है, जिनमें करीब 20 हजार अकेले बुजुर्ग मरीज शामिल हैं। फील्ड में तैनात इस टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट के साथ एएनएम और आशा कार्यकर्ता शामिल होती हैं, जो जरूरत पड़ने पर टेली-परामर्श से विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी जोड़ती हैं।

57 हजार से ज्यादा केयर गिवर्स को मिला विशेष प्रशिक्षण

स्वास्थ्य सेवाओं के इस जमीनी विस्तार को मजबूती देने के लिए मानव संसाधन तैयार करने पर भी पूरा जोर दिया गया है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक सेवा पहुंचाने के लिए अब तक लगभग 57 हजार केयर गिवर्स को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

इसके साथ ही मैदानी स्तर पर काम करने वाली करीब 10 हजार एएनएम, 21 हजार से अधिक आशा सहयोगिनियों और लगभग 10 हजार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) को भी पेलिएटिव केयर का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सरकार की योजना इन सेवाओं को बड़े अस्पतालों से निकालकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) तक पूरी तरह जोड़ने की है, ताकि हर जरूरतमंद मरीज को समय पर राहत मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर योजना क्या है?

होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर राजस्थान सरकार की एक जनकल्याणकारी पहल है, जिसके तहत गंभीर व असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों और बेड-रिडन बुजुर्गों को घर बैठे नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, दवाइयां और परामर्श जैसी स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं।

इस योजना के तहत अब तक कितने मरीजों को लाभ मिला है?

पिछले सवा साल में इस पहल के माध्यम से तीन लाख से अधिक गंभीर रोगियों को स्वास्थ्य सेवाएं और राहत पहुंचाई जा चुकी है।

‘राहत की किरण’ वाहन का क्या उपयोग है?

‘राहत की किरण’ वाहन के जरिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम आवश्यक दवाइयों और उपकरणों के साथ मरीजों के घर पहुंचती है और उन्हें घर पर ही पेलिएटिव केयर उपलब्ध कराती है।

किन-किन बीमारियों के मरीजों को इस सेवा का लाभ मिलता है?

इस योजना के तहत कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, अल्जाइमर और अन्य असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को घर पर ही जरूरी चिकित्सीय और मानसिक सहयोग दिया जाता है।