राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य में प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रही ई-सिगरेट के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि जयपुर शहर में ई-सिगरेट के अवैध कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह और न्यायमूर्ति संदीप तनेजा की खंडपीठ ने अधिवक्ता प्रियांशा गुप्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं। अदालत ने सरकार को 15 सितंबर तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

2019 से पूर्ण प्रतिबंध, फिर भी बाजार में खुलेआम उपलब्धता

याचिका में अदालत को बताया गया कि केंद्र सरकार ने 2019 में कानून बनाकर ई-सिगरेट के निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। इसके बावजूद प्रदेशभर में ई-सिगरेट आसानी से मिल रही है।

अदालत में यह भी उठाया गया कि कई जगहों पर नाबालिग भी खुलेआम ई-सिगरेट का सेवन करते दिख रहे हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक, इससे यह साफ होता है कि राज्य सरकार इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में नाकाम रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।

जिला स्तर पर प्राधिकृत अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश

मामले की पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। DGP को सभी रेंज मुख्यालयों के अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित करने को कहा गया था, जो कानून के प्रावधानों को जमीन पर लागू कराए।

इसके साथ ही, मुख्य सचिव को अधिनियम के तहत हर जिले में जिलाधिकारी या उप जिलाधिकारी स्तर के प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए थे। ये अधिकारी जिला स्तर पर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करेंगे। अब इन निर्देशों के बाद राज्य सरकार को जयपुर में हुई कार्रवाई का पूरा हिसाब अदालत के सामने रखना होगा।