राजस्थान यूथ कांग्रेस के सांगठनिक चुनावों के नतीजे सामने आ चुके हैं। पार्टी संगठन की कमान अब अभिषेक चौधरी के हाथों में सौंपी जा रही है। संगठनात्मक चुनाव में सर्वाधिक मत हासिल करने के बाद चौधरी का नया अध्यक्ष बनना तय हो गया है। फलोदी जिले के एक ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखने वाले चौधरी ने छात्र राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति तक लंबा सफर तय किया है।
किसान परिवार से ताल्लुक और छात्र राजनीति की शुरुआत
अभिषेक चौधरी का जन्म फलोदी जिले के चिमाना गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ है। उनके पिता कृषि कार्य से जुड़े रहने के साथ वकालत भी कर चुके हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। स्कूली शिक्षा गृह जिले में पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए राजधानी जयपुर आए और राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।
विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय कदम रखा और लॉ कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए। साल 2014 के दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अनिल चोपड़ा के साथ उनका मुकाबला काफी चर्चा में रहा था।
एनएसयूआई से लेकर विधानसभा चुनाव तक का सफर
संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए जुलाई 2020 में उन्हें एनएसयूआई राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। जनवरी 2024 तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने छात्र हितों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संगठन का नेतृत्व किया।
इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें साल 2023 के विधानसभा चुनाव में जयपुर शहर की झोटवाड़ा सीट से मैदान में उतारा। हालांकि वे चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने 97,746 वोट हासिल कर भाजपा प्रत्याशी कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को कड़ी टक्कर दी थी।
सामाजिक सरोकार और जनसेवा के कार्य
राजनीतिक गतिविधियों के अलावा चौधरी सामाजिक सेवा के अभियानों से भी जुड़े रहे हैं। उनके प्रमुख संकल्पों में 1008 जरूरतमंद बहनों का निःशुल्क विवाह कराना शामिल है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस पहल के तहत अब तक 360 विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं।
इसके अलावा 'योग्य शाला' नामक पहल के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा में सहयोग किया जा रहा है। इस कार्यक्रम से फिलहाल 150 जरूरतमंद बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। बाड़मेर सहित राज्य के अन्य हिस्सों में भी वे सामाजिक और मानवीय सहायता कार्यों में सक्रिय रहे हैं।
