रायसेन शहर की रॉयल सिटी कॉलोनी में इस शारदीय नवरात्रि पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दे रही है। यहां पिछले 10 सालों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार स्थानीय महिलाओं और बेटियों ने मिलकर काली मिट्टी और हरी दूर्वा से मां दुर्गा (वनदेवी) की इको-फ्रेंडली प्रतिमा तैयार की है। पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से बनी यह मूर्ति शहरभर में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
8 से 10 दिनों में घर पर तैयार हुई प्रतिमा
रॉयल सिटी परिवार द्वारा आयोजित इस अनुष्ठान में इस बार पूरी तरह केमिकल-मुक्त सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। समिति के संरक्षक रघुवीर सिंह भदौरिया के मुताबिक, समिति के अध्यक्ष रिंकू शर्मा के मार्गदर्शन में कॉलोनी की मातृशक्ति और बेटियों ने करीब 8 से 10 दिनों की मेहनत के बाद घर पर ही इस प्रतिमा को स्वरूप दिया है।
इस इको-फ्रेंडली मूर्ति के निर्माण में लगभग 15,000 रुपये की लागत आई है। कॉलोनीवासी हर साल किसी न किसी नई थीम पर प्राकृतिक सामग्री से ही देवी प्रतिमाओं की स्थापना करते आए हैं। इससे पहले यहां लौंग, इलायची, सुपारी और अन्य प्राकृतिक वस्तुओं से भी प्रतिमाएं तैयार की जा चुकी हैं।
त्रिकूट पर्वत और गुफा की थीम पर सजा पंडाल
मां वनदेवी के इस दरबार को त्रिकूट पर्वत की तर्ज पर सजाया गया है। पंडाल के भीतर प्रवेश करने के लिए गुफा नुमा रास्ता बनाया गया है, जो प्राकृतिक लताओं, पत्तियों और हरी बेलों से आच्छादित है।
गुफा में प्रवेश करते ही सबसे पहले श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करते हैं। इसके बाद भगवान शिव के पूरे परिवार, मां वनदेवी, माता वैष्णो देवी और भैरवनाथ के स्वरूपों के दर्शन करते हुए मार्ग बाहर की तरफ निकलता है। पंडाल के भीतर का यह हरा-भरा और प्राकृतिक वातावरण देखने पहुंच रहे श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहा है। सुबह से लेकर देर शाम तक मां के दर्शन के लिए यहां भक्तों की लंबी कतारें लग रही हैं।
पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश
रॉयल सिटी दुर्गा उत्सव समिति के इन नवाचारों और पर्यावरण जागरूकता के प्रयासों को पहले भी सराहना मिल चुकी है। समिति को हिंदू उत्सव समिति सहित कई सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। आयोजकों का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि प्रकृति को सहेजने, जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने और स्वच्छता अपनाने के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
