राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए जरूरी खबर है। राज्यभर के सरकारी विद्यालयों में शीतकालीन समय-सारिणी लागू करने की तारीख में बदलाव किया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के संशोधित आदेशों के मुताबिक अब 16 अक्टूबर से प्रदेश के सभी एक पारी वाले स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित किए जाएंगे।
तय शेड्यूल के अनुसार, 15 अक्टूबर तक स्कूलों का संचालन सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक हो रहा था। गर्मी और उमस के कारण इस समय-सारिणी में आंशिक संशोधन किया गया है, जो सत्र 2026-27 के शिविरा पंचांग के तहत 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा।
सितंबर की उमस और बढ़ी मांग के बाद बदला निर्णय
शिक्षा विभाग की ओर से पहले शीतकालीन समय-सारिणी 1 अक्टूबर से लागू किए जाने का प्रस्ताव था। लेकिन सितंबर महीने में प्रदेश के कई इलाकों में तापमान बढ़ने और उमस का असर तेज होने के कारण शिक्षक संगठनों और अभिभावकों ने समय में बदलाव की मांग उठाई थी। विभाग ने इस पर सहमति जताते हुए नई तारीख 16 अक्टूबर तय कर दी।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अमूमन 1 अक्टूबर से ही समय बदला जाता रहा है, हालांकि 2022, 2023 और 2024 में भी गर्मी के मिजाज को देखते हुए समय-सारिणी आगे बढ़ाई गई थी। इस बार भी मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बदलाव किया गया है।
प्रार्थना सभा से लेकर कालांश तक, यह रहेगा नया टाइमटेबल
एक पारी वाले विद्यालयों के लिए शिक्षा विभाग ने विस्तृत समय-सारिणी जारी की है:
- सुबह 9:55 बजे चेतावनी और सूचना की घंटी बजेगी।
- सुबह 10:00 से 10:25 बजे तक प्रार्थना सभा आयोजित होगी।
- स्कूल में कुल आठ कालांश होंगे, जिनमें पहले से पांचवें कालांश की अवधि 35-35 मिनट और बाकी के तीन कालांश 30-30 मिनट के होंगे।
- दोपहर 1:05 से 1:30 बजे तक मध्यांतर (लंच) रहेगा और ठीक शाम 4:00 बजे छुट्टी होगी।
दो पारी वाले स्कूलों के लिए नियम
दो पारियों में संचालित होने वाले विद्यालयों का कुल समय सुबह 7:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रहेगा, जिसमें प्रत्येक पारी पांच-पांच घंटे की होगी। हालांकि, दो पारी के संचालन के लिए संबंधित संभागीय संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है।
नए समय के कारण छोटे बच्चों को दोपहर की तेज धूप और तपन के बीच घर लौटने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा, जिसे लेकर प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों की सुरक्षा और व्यवस्था का पूरा ध्यान रखें।
