Saturday, 10 October 2026
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सागर का रहस्यमयी पनारी धाम: विशाल वटवृक्ष की छांव में विराजती हैं चौसठ योगिनियां, दाल-बाटी का लगता है विशेष भोग

संक्षेप में

मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी तहसील के पनारी गांव में स्थित चौसठ योगिनी धाम किसी इमारत में नहीं, बल्कि सैकड़ों साल पुराने 2-3 एकड़ में फैले विशाल वटवृक्ष की छांव में स्थित है, जहां बरगद की जड़ों को माता का स्वरूप मानकर पूजा जाता है और दाल-बाटी का भोग लगाया जाता है।

मुख्य बातें

  • पनारी धाम सागर जिले की देवरी तहसील के पनारी गांव में स्थित है।
  • यह मंदिर किसी भवन में नहीं बल्कि 2-3 एकड़ में फैले विशाल वटवृक्ष की छांव में है।
  • यहां माता को पारंपरिक रूप से दाल-बाटी का भोग लगाया जाता है।
  • मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु वटवृक्ष की शाखाओं पर पीतल और लोहे के घंटे बांधते हैं।
धर्म
सागर का रहस्यमयी पनारी धाम: विशाल वटवृक्ष की छांव में विराजती हैं चौसठ योगिनियां, दाल-बाटी का लगता है विशेष भोग

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में आस्था और प्रकृति का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो देश के अन्य शक्तिपीठों से बिल्कुल अलग है। सागर जिले की देवरी तहसील के पनारी गांव में स्थित मां चौसठ योगिनी धाम किसी भव्य इमारत या पहाड़ी पर नहीं, बल्कि सैकड़ों साल पुराने एक विशाल वटवृक्ष की घनी छांव में बसा हुआ है। प्रकृति की गोद में स्थित इस पावन स्थल पर देवी की कोई कृत्रिम छत या गुंबद नहीं है, बल्कि बरगद की विशाल जड़ें और शाखाएं ही इस दरबार की दीवारें और छत का काम करती हैं।

किंवदंतियों के अनुसार, करीब 2 से 3 एकड़ के दायरे में फैला यह बरगद का पेड़ कोई साधारण वटवृक्ष नहीं है, बल्कि इसके भीतर मां चौसठ योगिनियों की शक्तियां समाहित हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्षों पहले यह पेड़ अपनी जड़ों को चीरकर माता के प्रकट होने का गवाह बना था। यहां बरगद की प्राचीन जड़ों को ही माता का स्वरूप मानकर पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। बुंदेलखंड की माटी की इस संस्कृति में सनातन परंपराओं और प्रकृति पूजन का यह रूप हर आने वाले को आकर्षित करता है।

दाल-बाटी का विशेष भोग और मन्नतों के घंटे

पनारी धाम की सबसे अनोखी परंपरा यहां चढ़ने वाला प्रसाद है। आम मंदिरों की तरह यहां मिठाइयों या फलों के बजाय मां को पारंपरिक रूप से दाल-बाटी का भोग लगाया जाता है। यह अनूठी परंपरा बुंदेलखंड की ग्रामीण संस्कृति और लोक-जीवन की गहरी छाप को बयां करती है।

इस दरबार को लेकर श्रद्धालुओं में अटूट विश्वास है। मान्यता है कि सच्चे मन से यहां जो भी मुराद मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। मुराद पूरी होने के बाद भक्त दूर-दूर से आकर वटवृक्ष की शाखाओं और मंदिर परिसर में पीतल व लोहे के सैकड़ों घंटे बांधते हैं। ये अनगिनत घंटे इस बात की गवाही देते हैं कि इस रहस्यमयी धाम के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है।

नवरात्रि में लगता है भक्तों का महाकुंभ

साल में दो बार आने वाले चैत्र और शारदीय नवरात्रि के पावन अवसरों पर पनारी ग्राम का यह धाम एक बड़े मेले में तब्दील हो जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इन उत्सवों में मध्य प्रदेश के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी हजारों श्रद्धालु और दर्शनार्थी माता के आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। इन दिनों में यहां की रौनक देखने लायक होती है।

कैसे पहुंचें पनारी धाम?

यह धाम सागर जिला मुख्यालय से लगभग 65 से 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देवरी विधानसभा क्षेत्र के महाराजपुर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर पनारी ग्राम पंचायत आती है, जहां यह पावन स्थल अवस्थित है। सड़क मार्ग के जरिए देवरी और महाराजपुर होते हुए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। नवरात्रि के दौरान प्रशासन और स्थानीय स्तर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष परिवहन व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मां चौसठ योगिनी धाम कहाँ स्थित है?

मां चौसठ योगिनी धाम मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी तहसील के पनारी ग्राम में स्थित है, जो जिला मुख्यालय से करीब 65 से 85 किलोमीटर दूर है।

पनारी धाम की क्या विशेषता है?

यह धाम किसी इमारत या पहाड़ पर नहीं, बल्कि 2 से 3 एकड़ में फैले सैकड़ों साल पुराने विशाल वटवृक्ष की छांव में बसा है, जहां बरगद की जड़ों को ही माता का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।

पनारी धाम में किस चीज़ का भोग लगाया जाता है?

माता को प्रसन्न करने के लिए यहां पारंपरिक रूप से दाल-बाटी का विशेष भोग लगाया जाता है, जो बुंदेलखंड की संस्कृति को दर्शाता है।

मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां क्या चढ़ाते हैं?

मुराद पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर परिसर और वटवृक्ष की शाखाओं पर पीतल और लोहे के सैकड़ों घंटे बांधते हैं।