सागर-कानपुर नेशनल हाईवे के कर्रापुर टोल प्लाजा पर वाहन चालकों की परेशानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फास्टैग वैध होने और खाते में पर्याप्त राशि होने के बावजूद गाड़ियों को 5 से 10 मिनट तक रोके जाने की शिकायतें सामने आई हैं। चालकों का आरोप है कि स्कैनर खराब होने और सॉफ्टवेयर काम न करने का बहाना बनाकर उन्हें बेवजह इंतजार कराया जा रहा है।
स्कैनर खराब होने का हवाला और कैश भुगतान का दबाव
नियमों के मुताबिक फास्टैग होने पर गाड़ियों का बिना रुके निकलना तय है, लेकिन कर्रापुर टोल पर स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। चालकों का कहना है कि तकनीकी खराबी का हवाला देकर उन्हें लाइन में खड़ा रखा जाता है।
कुछ मामलों में चालकों पर नकद भुगतान करने का दबाव भी बनाया जा रहा है। विरोध करने पर टोल कर्मचारियों और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
क्या कहती है टोल व्यवस्था?
फास्टैग प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना और समय बचाना है। इसके बावजूद सागर बंडा रोड स्थित इस टोल प्लाजा पर वाहन चालकों को किन वजहों से परेशानी उठानी पड़ रही है, इसे लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
वाहन चालकों ने मांग की है कि टोल प्लाजा पर तकनीकी व्यवस्था दुरुस्त की जाए और स्कैनिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि सफर करने वालों को बिना किसी बाधा के निकाला जा सके। अब देखना यह होगा कि इन शिकायतों के बाद जिम्मेदार अधिकारी टोल प्रबंधन पर क्या कार्रवाई करते हैं।
