कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता खतरे में है और देश के लोकतांत्रिक ढांचे के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
पायलट ने दावा किया कि आबादी और मतदाताओं की स्वाभाविक संख्या बढ़ने के विपरीत, देश भर में सुनियोजित तरीके से लोगों के वोट काटे जा रहे हैं।
'वोटबंदी' और ईआरओ की शक्तियों के केंद्रीकरण का आरोप
चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पायलट ने कहा कि इतिहास में पहली बार लक्षित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। नोटबंदी के बाद अब नागरिकों पर 'वोटबंदी' थोपी जा रही है। उन्होंने कहा कि मतदान का संवैधानिक अधिकार छीना जाना लोकतंत्र की पराकाष्ठा है।
पायलट के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है। नियमों के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की अधिकारिता इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी एसडीएम स्तर के अधिकारी के पास होती है।
लेकिन आरोप है कि ईआरओ की इन शक्तियों को अपने हाथ में लेकर दिल्ली से निजी दफ्तरों के जरिए सीधे नाम हटाए और जोड़े जा रहे हैं। हरियाणा, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के चुनावी आंकड़ों में चुनिंदा वोट काटे जाने की बात सामने आई है, जो पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगाती है।
संवैधानिक संस्थाओं की साख और प्रधानमंत्री पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पायलट ने जोर दिया कि लोकतंत्र की संरक्षक संस्थाएं आज सत्ताधारी दल की मदद करती दिख रही हैं। जब चुनावी कार्यप्रणाली और आचार संहिता के पालन में पक्षपात नजर आने लगे, तो जनता का उन संस्थाओं से विश्वास उठ जाता है। आचार संहिता लागू होने के बावजूद एनडीए के घटक दलों के खातों में धन आवंटन की अनुमति दिए जाने जैसे मामले निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े करते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन फैसलों को केवल चुनाव आयोग तक सीमित नहीं माना जा सकता। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं को राजनीतिक और वैचारिक संरक्षण शीर्ष स्तर से मिल रहा है। लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ कांग्रेस और देश के जागरूक नागरिक अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
