शहडोल रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन बीमार और दिव्यांग यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं अब भी नदारद हैं। प्लेटफॉर्म बदलने के लिए रैंप की व्यवस्था न होने के कारण एक फ्रैक्चर मरीज को व्हीलचेयर पर बैठाकर रेलवे पटरियों के बीच से ले जाने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
गिट्टियों के बीच से व्हीलचेयर ले जाने की मजबूरी
घटना शहडोल रेलवे स्टेशन की है, जहां स्थानीय निवासी मो. सैय्यद का पैर फ्रैक्चर हो गया था। बेहतर इलाज के लिए उन्हें जबलपुर जाना था। स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने पहुंचे परिजनों के सामने बड़ी मुसीबत तब खड़ी हुई जब उन्हें एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म जाने के लिए कोई सुलभ रास्ता नहीं मिला।
स्टेशन पर व्हीलचेयर या स्ट्रेचर के लिए रैंप न होने के कारण परिजनों को मजबूरी में मरीज को व्हीलचेयर पर ही बैठाकर रेलवे ट्रैक की पटरियों के बीच पड़ी नुकीली गिट्टियों से होकर गुजरना पड़ा। इस दौरान मरीज की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था और थोड़ी सी चूक से बड़ा हादसा हो सकता था।
यात्रियों की परेशानी और प्रशासनिक दावे
शहडोल रेलवे स्टेशन पर रैंप की सुविधा न होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी चलने-फिरने में असमर्थ कई मरीजों और बुजुर्गों को परिजनों की गोद, पीठ या स्ट्रेचर के सहारे ट्रैक पार कराना पड़ा है। स्टेशन के सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये फूंके जा चुके हैं, लेकिन यात्रियों की सहूलियत के लिए जरूरी लिफ्ट, एस्केलेटर या रैंप जैसी व्यवस्थाएं फाइलों में ही अटकी हुई हैं।
मो. सैय्यद के परिजन ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया- "पैर टूटने के बाद इलाज के लिए जबलपुर निकलना था। स्टेशन पर रैंप नहीं होने से व्हीलचेयर को सीधे पटरियों के बीच गिट्टियों पर से निकालना पड़ा। मरीज की जान जोखिम में डालकर सफर करने की यह मजबूरी सिस्टम की पोल खोलती है।"
सुरक्षा के दावों पर उठे सवाल
पटरियों के बीच से व्हीलचेयर ले जाने का यह वीडियो सामने आने के बाद यात्रियों में भारी नाराजगी है। जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर इन तस्वीरों ने रेलवे के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या रेलवे प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठा है या यात्रियों की इस बुनियादी जरूरत को पूरा करने के लिए जल्द कदम उठाया जाएगा।
