आरयूएचएस ने येलो फीवर का टीकाकरण करने में पूरे राजस्थान में अव्वल स्थान हासिल किया है। उपयोग यूजेज के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा जारी रैंकिंग में RUHS को देश के 'हाई यूसेज' संस्थानों की सूची में शामिल किया गया है, जबकि प्रदेश के अन्य बड़े चिकित्सा केंद्र काफी पीछे रह गए हैं। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों की यात्रा करने वाले लोगों के येलो फीवर टीकाकरण में आरयूएचएस हॉस्पिटल प्रदेश में पहले स्थान पर है। जनवरी 2025 से अब तक यहां पर 5140 यात्रियों को येलो फीवर का टीका लगाया गया है। जानकारी के लिए बता दे की अब तक किसी भी व्यक्ति में वैक्सीन का साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय निर्धारित नियम के अनुरूप संचालित येलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर पर एक ही छत के नीचे येलो फीवर व ओरल पोलियो टीकाकरण की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही यहाँ ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, ट्रेवल हेल्थ काउंसलिंग और इंटरनेशनल सर्टिफिकेट ऑफ वैक्सीनेशन या प्रोफाइलेक्सिस (आईसीवीपी) जारी करने की सुविधा उपलब्ध भी कराई जा रही है। देश में येलो फीवर वैक्सीनेशन उपयोग के आधार पर आरयूएचएस हाई यूसेज, एम्स जोधपुर मॉडरेट और एसएमएस अस्पताल जयपुर लो यूसेज श्रेणी में शामिल हैं। देशभर में हाई श्रेणी में 27, मॉडरेट में 16 और लो श्रेणी में 22 संस्थान हैं। बता दे की यह बीमारी डीज मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल रोग है। भारत में यह बीमारी नहीं है, लेकिन प्रभावित देशों की यात्रा से पहले कई देशों में इसका टीकाकरण अनिवार्य है। बीमारी की गिरफ्त में आने पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, जी मिचलाना, ब्लीडिंग, पीलिया, लिवर व किडनी प्रभावित होना शामिल है। गंभीर स्थिति में यह जानलेवा हो सकता है। यह टीका 9 माह या उससे अधिक उम्र के पात्र व्यक्ति को केवल एक बार लगाया जाता है। टीका लगने के 10 दिन बाद से इसकी वैधता शुरू होती है और आजीवन मान्य रहती है। टीके का शुल्क स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 300 रुपए प्रति डोज निर्धारित किया है। प्रदेश में आरयूएचएस, एसएमएस अस्पताल जयपुर और एम्स जोधपुर में यह सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2023 से आरयूएचएस में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को टीकाकरण किया जाता है। वैक्सीन वाले दिन यात्रियों को पासपोर्ट जैसे यात्रा दस्तावेज और हस्ताक्षरित सहमति पत्र साथ लाना अनिवार्य है।
