छिंदवाड़ा। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। वहीं भाई भी जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है। इसी प्रेम और स्नेह के पर्व को लेकर जिला जेल छिंदवाड़ा में एक अनोखी पहल देखने को मिल रही है।
जिला जेल में निरुद्ध महिला बंदी अपने हाथों से भाइयों के लिए सुंदर रक्षा सूत्र तैयार कर रही हैं। महिलाएं एक-एक धागे को बुनकर उसमें मोती पिरो रही हैं और प्रेम व स्नेह से रक्षा सूत्र तैयार कर रही हैं। इन राखियों में महिला बंदियों की मेहनत के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की नई उम्मीद भी दिखाई दे रही है।जिला जेल के जिला अधीक्षक प्रतीक जैन ने बताया कि महिला बंदियों को रक्षा सूत्र बनाने के लिए आवश्यक धागा, मोती एवं अन्य कच्चा माल जेल प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराया गया है। महिला बंदियों को रक्षा सूत्र तैयार करने के लिए दो दिन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके बाद वे स्वयं अपने हाथों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं।जिला जेल प्रबंधन की ओर से लगभग 2 हजार रक्षा सूत्र तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। तैयार राखियों की जेल परिसर में कैंटीन के माध्यम से बिक्री की जाएगी, जहां बाजार की तुलना में कम कीमत पर लोगों को राखियां उपलब्ध कराई जाएंगी। राखियों की बिक्री से होने वाले लाभ में से एक हिस्सा उन महिला बंदियों को भी दिया जाएगा, जो इन रक्षा सूत्रों को तैयार कर रही हैं।जिला जेल प्रबंधन का उद्देश्य केवल राखियां तैयार करवाना नहीं, बल्कि महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनमें रोजगार के प्रति रुचि विकसित करना है। जेल से बाहर निकलने के बाद वे स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ सकें, इसी दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर महिला बंदियों द्वारा तैयार किए जा रहे ये रक्षा सूत्र केवल धागे और मोतियों से बनी राखियां नहीं हैं, बल्कि इनमें पश्चाताप, मेहनत, आत्मनिर्भरता और नई जिंदगी की उम्मीद भी जुड़ी हुई है।