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बालाघाट में करोड़ो रुपये की जमीन हड़पने का बड़ा मामला

मध्य प्रदेश
बालाघाट में करोड़ो रुपये की जमीन हड़पने का बड़ा मामला

बालाघाट जिले के वारासिवनी में आदिवासी परिवार की करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने का बड़ा मामला सामने आया है। चर्चित जमीन कारोबारी सुनील अरोरा पर आदिवासी वरकड़े परिवार की करोड़ो रुपये मूल्य की पैतृक जमीन फर्जी तरीके से कब्जाने और अवैध प्लाटिंग कराने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने बालाघाट पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। खास बात यह है कि आरोपी सुनील अरोरा पहले से ही सूदखोरी के मामले में गिरफ्तार होकर जेल में बंद है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित कर जांच शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार वारासिवनी के वारा निवासी सनुला, आसन, धनु, विनोद, मनोज और दिनेश वरकड़े की मदनपुर रोड स्थित करीब 9 एकड़ पैतृक जमीन वर्षों से विवादित कब्जे में थी। जब परिवार को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने तहसील कार्यालय में आवेदन देकर जमीन वापस दिलाने की मांग की। इसी दौरान जमीन कारोबारी सुनील अरोरा ने परिवार से संपर्क किया और भरोसा दिलाया कि वह उनकी जमीन वापस दिलवा देगा। परिवार का आरोप है कि विश्वास में लेकर सुनील अरोरा ने जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए और बाद में पूरी जमीन हड़पने की साजिश रच डाली।पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें बकेरा के एक ढाबे में रातभर रोककर रखा गया और अगले दिन देर रात करीब 9 बजे वारासिवनी रजिस्ट्री कार्यालय ले जाया गया। वहां अंगूठा लगवाने के बदले परिवार के लोगों को तीन से पांच हजार रुपये दिए गए और करोड़ों रुपये की जमीन बकेरा की दो आदिवासी महिलाओं के नाम रजिस्ट्री करा दी गई। परिवार का कहना है कि जब भी वे अपनी जमीन के बारे में पूछते थे तो सुनील अरोरा उन्हें लगातार टालता रहा और भरोसा दिलाता रहा कि जमीन वापस मिल जाएगी। लेकिन जब उसी जमीन पर अवैध प्लाटिंग शुरू हुई तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद पीड़ित परिवार सीधे एसपी कार्यालय पहुंचा और कार्रवाई की मांग की।मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि आरोपी सुनील अरोरा पहले से ही सूदखोरी प्रकरण में जेल में बंद है। अब आदिवासी वरकड़े परिवार की जमीन हड़पने की शिकायत भी प्राप्त हुई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जमीन के दस्तावेज, रजिस्ट्री और पूरे लेन-देन की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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