भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र अब सिर्फ डिग्रियां लेकर नौकरी की कतार में खड़े होने के बजाय खुद का कारोबार शुरू करने में जुट गए हैं। आईआईटी मंडी और बेंगलुरु के रेवा विश्वविद्यालय की ओर से जारी ‘विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025’ के मुताबिक, देश के 22 प्रतिशत कॉलेज छात्र पहले ही अपना व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। यह आँकड़ा 23 प्रतिशत के वैश्विक औसत के लगभग बराबर है।
मोहाली में आयोजित भारतीय प्रबंधन संस्थान व्यवसाय सम्मेलन 2025 के दौरान 9 अक्टूबर को जारी इस रिपोर्ट में देश के 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 1,200 से अधिक संस्थानों के 25,783 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। अध्ययन के अनुसार, हर 100 में से 43 विद्यार्थी अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं, जबकि मौजूदा समय में स्टार्टअप शुरू करने वाले 35.5 प्रतिशत छात्रों को नियमित बिक्री से आमदनी भी हो रही है।
सरकारी नौकरी के प्रति घटता रुझान
रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि युवाओं की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद अपना उद्यम शुरू करने की चाह रखने वाले विद्यार्थियों का अनुपात 2023 के 14 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 16.2 प्रतिशत हो गया है। इसके उलट, सरकारी नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले छात्र 12.7 प्रतिशत से घटकर 10.1 प्रतिशत पर आ गए हैं। बड़ी कंपनियों में नौकरी तलाशने वालों का अनुपात भी 31.3 प्रतिशत से लुढ़ककर 27.4 प्रतिशत रह गया है।
स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा असफलता से घबराने के बजाए दोबारा प्रयास करने में आगे हैं। नियमित बिक्री करने वाले ऐसे उद्यमों में से 31 प्रतिशत की स्थापना अकेले 2025 में हुई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 18 प्रतिशत है। इसके अलावा, 42 प्रतिशत भारतीय छात्र उद्यमी दो या उससे अधिक व्यवसाय संचालित कर रहे हैं, जबकि वैश्विक औसत 25 प्रतिशत है।
नेटवर्क और व्यावहारिक अनुभव का असर
अध्ययन में यह भी सामने आया है कि जिन विद्यार्थियों के परिवार, मित्रों या शिक्षकों के दायरे में पहले से कोई उद्यमी मौजूद है, उनके खुद का कारोबार शुरू करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से महिलाओं की भागीदारी अभी भी पुरुषों से थोड़ी कम है; कारोबार शुरू करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं में से 45 प्रतिशत ने वास्तव में उद्यम शुरू किया है, जबकि पुरुषों में यह अनुपात 53 प्रतिशत है।
आईआईटी मंडी के प्रबंधन अध्ययन विभाग के सहायक प्राध्यापक और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ. पूरन सिंह ने बताया कि देश के छात्र वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वाकांक्षी युवाओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि परिसरों में बने उद्यमिता केंद्र और पाठ्यक्रम इसमें सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब जरूरी है कि छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही सही मंच और व्यावहारिक अनुभव मिले।
भविष्य की योजनाएं और सुझाव
रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कुछ मुख्य सिफारिशें दी हैं। इनमें केवल विचार या इच्छा मापने के बजाय यह आकलन करना शामिल है कि कितने छात्र जमीन पर उतरकर वास्तव में उद्यम स्थापित कर रहे हैं। इसके अलावा, परिसरों में सफल उद्यमियों और पूर्व छात्रों को जोड़कर व्यावहारिक सीख का माहौल मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
