सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की अंतरिम मेडिकल बेल की मांग गुरुवार को ठुकरा दी। जस्टिस एम.एस. सुंदरश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने एम्स की मेडिकल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यह फैसला सुनाया। हालांकि, अदालत ने उनकी स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए जेल के भीतर 24 घंटे देखभाल के लिए अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर रखने की अनुमति दे दी है।
एम्स की रिपोर्ट का अध्ययन कर कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि एम्स की विस्तृत रिपोर्ट में ऐसी कोई आपात स्थिति नजर नहीं आई, जिसके आधार पर उन्हें तुरंत जेल से रिहा किया जाए। आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने दलील दी थी कि उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
वकीलों ने बेहतर इलाज और निरंतर देखभाल के वास्ते अंतरिम जमानत दिए जाने की मांग की थी। हालांकि, पीठ ने इन दलीलों को नाकाफी मानते हुए फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ती है, तो वे नई परिस्थितियों के आधार पर दोबारा अंतरिम जमानत की अर्जी दे सकते हैं।
पैरोल की बात छिपाने पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत का ध्यान इस बात पर भी गया कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल की बात सुप्रीम कोर्ट के सामने छिपाई थी। इस पर पीठ ने खासी नाराजगी जताई और कहा कि अदालत में याचिका दाखिल करते वक्त सभी प्रासंगिक तथ्यों का पूरा खुलासा किया जाना चाहिए।
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को 27 मई को बरकरार रखा था। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, इसी मामले में हाईकोर्ट ने उन्हें 20 दिन की पैरोल भी दी थी, जिसके दौरान सुरक्षा और फरार होने की आशंकाओं को खारिज कर दिया गया था।
जेल प्रशासन को दिए गए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को यह भी निर्देश दिए हैं कि आसाराम को जेल के अंदर ही सभी आवश्यक चिकित्सीय सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब वे जेल में रहते हुए ही अपनी पसंद के ट्रेंड केयरटेकर की मदद ले सकेंगे।
