अमेरिका में करीब एक सदी बाद सार्वजनिक रूप से मौत की सजा देने की तैयारी है। पूर्व आर्मी मेजर निदाल हसन को फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर गोली मारकर मौत के घाट उतारा जाएगा और इस पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रसारण किया जाएगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस सजा का सीधा प्रसारण किया जाएगा ताकि आम नागरिक इसे देख सकें। पिछले 100 वर्षों में अमेरिका में यह पहली ऐसी मौत की सजा होगी जिसे सार्वजनिक किया जाएगा। अमेरिकी सैन्य न्याय प्रणाली के तहत 1961 के बाद किसी सैनिक को मौत की सजा मिलने का यह पहला मामला है। सैन्य अदालत ने 2013 में हसन को दोषी ठहराया था और आखिरी बार 1961 में प्राइवेट जॉन ए. बेनेट को सैन्य व्यवस्था में मृत्युदंड दिया गया था।
2009 का फोर्ट हुड हमला और निदाल हसन का गुनाह
यह घटना 5 नवंबर 2009 की है जब सेना के मनोचिकित्सक के रूप में तैनात मेजर निदाल हसन अपनी निजी पिस्तौल लेकर टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर पहुंचा था। उसने धार्मिक नारे लगाते हुए सैनिकों और अन्य लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। उस वक्त अमेरिका इराक और अफगानिस्तान में युद्ध लड़ रहा था।
इस घातक सामूहिक गोलीबारी में 13 सैनिकों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। हमले के दौरान हसन भी घायल हो गया था, जिसके बाद वह कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया। सैन्य अदालत में सुनवाई के दौरान उसने स्वीकार किया था कि वह इन युद्धों को अनैतिक मानता था और उसने यह हमला 'जिहाद' के लिए किया था। सैन्य मानसिक स्वास्थ्य पैनल के सामने उसने कोई पछतावा नहीं जताया और यहां तक कहा कि मौत की सजा मिलने पर भी वह खुद को शहीद मानेगा।
फायरिंग स्क्वाड से सजा और राष्ट्रपति की मंजूरी
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, हसन को सैनिकों की एक टुकड़ी (फायरिंग स्क्वाड) गोली मारकर सजा देगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 2 अक्टूबर को ही निदाल हसन को इस सजा के तहत मौत की सजा दिए जाने की मंजूरी दे दी थी।
अमेरिकी सैन्य कानून के प्रावधानों के अनुसार किसी भी कैदी को मृत्युदंड देने के लिए राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी अनिवार्य होती है। हालांकि, कानूनी जानकारों का मानना है कि दोषी के पास अभी भी अदालतों में अपील करने का विकल्प खुला हुआ है, जिसके चलते इस 3 दिसंबर को तय सजा पर आखिरी समय में रोक भी लग सकती है।
