अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किए गए, जिसके तहत रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इस फैसले से भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देशों को बड़ी राहत मिली है, जो रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदार हैं।
यह कानून रूस की वित्तीय आय को सीमित करने के उद्देश्य से लाया गया था ताकि यूक्रेन संघर्ष के लिए उसके पास संसाधनों की कमी हो। हालांकि, ट्रम्प के इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता की उम्मीद जगी है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर टली बड़ी चुनौती
भारत अपनी कुल जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात के जरिए पूरा करता है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में रूसी हिस्सेदारी करीब 45% तक पहुंच गई थी।
इस दौरान भारत ने रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा। ऐसे में, यदि 100% टैरिफ का यह कानून लागू हो जाता, तो भारतीय रिफाइनरियों और घरेलू बाजार के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मसले पर स्पष्ट किया कि भारत ऊर्जा की वैश्विक उपलब्धता और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अपनी जरूरतें तय करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने के बीच रूस से तेल आयात रोकना वैश्विक कीमतों में भारी उछाल ला सकता था।
30 दिन की समयसीमा से पहले मिला छूट का फैसला
ट्रम्प ने इस बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे, जिसे 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 262-159 के बहुमत से पारित किया था। नियमों के तहत राष्ट्रपति को 30 दिन के भीतर इस पर अंतिम फैसला लेना था, लेकिन समयसीमा पूरी होने से पहले ही प्रशासन ने टैरिफ और प्रतिबंधों पर छूट देने की घोषणा कर दी।
इस बीच, अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों को इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और महंगाई से मतदाता सीधे प्रभावित हो रहे हैं। यूक्रेन के हमलों से रूसी रिफाइनरियों की सप्लाई प्रभावित होने के बाद वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा हुआ है, जिससे रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनावी जोखिम बढ़ गया है। संसद में बहुमत बनाए रखने के लिए ट्रम्प प्रशासन घरेलू स्तर पर कीमतें नियंत्रित रखना चाहता है।
पुतिन के साथ डीजल डील और यूरोपीय देशों की नाराजगी
इसी हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल आयात करने की एक नई डील का भी ऐलान किया था। इसके तहत रूस से डीजल बिक्री पर लगी पाबंदियों को अप्रैल 2027 तक के लिए शिथिल कर दिया गया है।
ट्रम्प के इस रुख से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय संघ के कई अधिकारी नाराज बताए जा रहे हैं। अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सांसदों ने भी राष्ट्रपति से डीजल बिक्री पर दी गई छूट को वापस लेने की मांग की है।
