अरावली हिल्स और रेंज की पारिस्थितिक स्थिति, परिभाषा और संरक्षण से जुड़े मामलों की पड़ताल के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी (एचपीसी) एक बार फिर राजस्थान पहुंच रही है। गुजरात के अरावली क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद कमेटी 11 से 13 अक्टूबर तक वागड़ के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में रहेगी। इस दौरे का मुख्य केंद्र उन इलाकों की टोह लेना है, जहां पहाड़ियों, जंगलों और खनन गतिविधियों का सीधा असर स्थानीय आदिवासी समुदायों की आजीविका पर पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के 25 मई, 2026 के आदेश पर गठित पांच सदस्यीय इस उच्चस्तरीय समिति की कमान आईसीएफआरई के महानिदेशक के पास है। कोर्ट ने यह कमेटी अरावली की पूर्व में तय की गई परिभाषा और उसके आधार पर होने वाले सीमांकन का स्वतंत्र और विशेषज्ञ मूल्यांकन करने के लिए बनाई थी।
दक्षिणी राजस्थान में जमीनी पड़ताल का शेड्यूल
गुजरात के अरावली क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद कमेटी 11 अक्टूबर को दक्षिणी राजस्थान में प्रवेश करेगी। तय कार्यक्रम के मुताबिक, पहले दिन डूंगरपुर जिले के पालदेवल-सरकन क्षेत्र में फील्ड विजिट होगी। इसके अगले दिन यानी 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा जिले के केवड़िया-कोठारा क्षेत्र में पड़ताल की जाएगी।
इन दोनों दिन शाम को करीब तीन घंटे की विशेष बैठकें रखी गई हैं। इनमें पर्यावरणविदों, खनन पट्टाधारकों, किसानों, श्रमिकों और आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों को बुलाकर सीधे सुझाव लिए जाएंगे। वागड़ के इन इलाकों में दौरे को लेकर राज्य सरकार ने भी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को फील्ड कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि डूंगरपुर और बांसवाड़ा के उप वन संरक्षक (डीएफओ) और मैदानी अमला लगातार कमेटी के साथ रहेगा।
क्यों हो रहा है दोबारा दौरा?
इससे पहले भी यह कमेटी राजस्थान के पांच दिवसीय दौरे पर आ चुकी है, जिसके तहत कई जगहों पर फील्ड विजिट और हितधारकों से बातचीत हुई थी। हालांकि, पिछले दौरे के दौरान ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लोगों की पर्याप्त भागीदारी न होने की बात सामने आई थी।
इसी कमी को दूर करने के लिए दक्षिणी राजस्थान में दोबारा जमीनी पड़ताल की मांग उठी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर के अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि कमेटी को राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका देना होगा। शीर्ष अदालत ने कमेटी को 30 नवंबर, 2026 तक अपनी व्यापक रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है।
खनन, जलस्रोत और भूमि उपयोग का आकलन
दौरे के दौरान कमेटी चयनित स्थलों पर जाकर खनन, स्टोन क्रशर, क्वारी, भूमि उपयोग में बदलाव, वन क्षेत्र की स्थिति और जल स्रोतों का बारीकी से आकलन करेगी। पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन का पूरा जोर इस बात पर है कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले हर वर्ग की राय को दस्तावेजी रूप दिया जाए।
{ "@context": "https://schema.org", "@graph": [
] }
