ब्यावर। नगर निकाय चुनाव के परिणाम घोषित होने से पहले ब्यावर में सियासी हलचल तेज हो गई है। संभावित चुनावी समीकरणों, भीतरघात और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच अब भाजपा के बाद कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। गुरुवार को कांग्रेस की ओर से जिला कांग्रेस मुख्खयालय पर अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद पार्टी के तमाम प्रत्याशियों को टेम्पो ट्रैवलर में बैठाकर ब्यावर से बाहर ले जाया गया है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के प्रत्याशियों को बिजयनगर के समीप एक रिजॉर्ट में ले जाया गया है। वहीं, कुछ प्रत्याशियों को देर रात ही ब्यावर से बाहर शिफफ्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। माना जा रहा है कि चुनाव परिणाम आने तक प्रत्याशियों को एकजुट रखने और किसी तरह की राजनीतिक सेंधमारी की संभावना को रोकने के लिए यह कवायद की गई है। कांग्रेस से पहले भाजपा भी अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर चुकी है। बुधवार देर रात भाजपा ने जीत के संभावित चेहरों को ब्यावर से बाहर कुंभलगढ़ स्थित एक रिजॉर्ट में शिफ्फट किया। पार्टी ने संभावित विजेताओं को एकजुट रखने और बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है। भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की गतिविधियों और आपसी संपर्क पर भी नजर रखे जाने की चर्चा है। खासतौर पर भीतरघात, क्रॉस वोटिंग और परिणाम के बाद बदलने वाले सियासी समीकरणों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने संभावित विजयी प्रत्याशियों की घेराबंदी शुरू की है। ब्यावर नगर निकाय चुनाव का परिणाम 14 सितंबर को घोषित होना है। ईवीएम में मतदाताओं का जनादेश बंद है, लेकिन राजनीतिक दलों ने परिणाम से पहले ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। दोनों प्रमुख दलों की ओर से प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नगर निकाय में बहुमत के आंकड़े को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही संभावित विजेता प्रत्याशियों पर नजर बनाए हुए हैं। परिणाम के बाद अध्यक्ष पद के चुनाव और बोर्ड गठन को लेकर बनने वाले सियासी समीकरणों में एक-एक पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में दोनों दल किसी भी संभावित टूट या क्रॉस वोटिंग की स्थिति से बचने के लिए पहले से ही मोर्चेबंदी में जुट गए हैं। चुनाव परिणाम से पहले प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी ने ब्यावर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। भाजपा के बाद कांग्रेस द्वारा भी प्रत्याशियों को शहर से बाहर ले जाने की सूचना के बाद अब चुनावी मुकाबला केवल ईवीएम के नतीजों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि परिणाम के बाद बोर्ड गठन और सत्ता की तस्वीर को लेकर भी राजनीतिक रणनीतियां तेज हो गई हैं। ईवीएम में किसके पक्ष में जनादेश आया है, इसका फैसला 14 सितंबर को होगा, लेकिन उससे पहले दोनों प्रमुख दल अपने-अपने संभावित विजेताओं को साधने में जुट गए हैं। ऐसे में ब्यावर में शुरू हुई यह रिजॉर्ट पॉलिटिक्स आने वाले दिनों में चुनावी नतीजों के साथ-साथ नगर निकाय की सत्ता के समीकरणों को लेकर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नतीजों से पहले राजनैतिक दलों की सियासी घेराबंदी तेज
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