विदेश में बैठे साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़े गिरोह का ब्यावर पुलिस ने भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्फतार किया है। आरोपी ई-मित्र संचालकों और पेट्रोल पंप संचालकों के बैंक खातों में साइबर ठगी की रकम डलवाकर कमीशन काटने के बाद नकदी हासिल करते थे। इसके बाद इस नकदी से क्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी खरीदी जाती थी और डिजिटल माध्यम से विदेश में बैठे साइबर ठगों को भेजी जाती थी। पुलिस जांच में इस पूरे नेटवर्क के हवाला कारोबार से जुड़े होने की भी जानकारी सामने आई है। बुधवार को डिप्टी आफिस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एसपी रतनसिंह ने बताया कि पुलिस महानिदेशक राजस्थान राजकुमार शर्मा, अतिरिक्त महानिदेशक साइबर क्राइम पी.के. सिंह तथा अजमेर रेंज के महानिरीक्षक के निर्देशन में जिला ब्यावर में साइबर अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ब्यावर डॉ. अनुकृति उज्जैनिया एवं वृत्ताधिकारी ब्यावर नरेंद्र पारीक के सुपरविजन में डीएसटी प्रभारी राजदीपेन्द्र सिंह, जवाजा थाना अधिकारी नवल किशोर तथा जिला साइबर सेल की टीम ने कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार जवाजा थाना क्षेत्र के सारोठ चौराहा स्थित ई-मित्र केंद्र संचालक तुलसा सिंह ने रिपोर्ट दी थी कि 28 अगस्त को उसकी दुकान पर तीन युवक आए। इनमें से रितिक नामक युवक से संचालक परिचित था। आरोपियों ने ई-मित्र के लेनदेन में इस्तेमाल होने वाला क्यूआर कोड मांगा। क्यूआर कोड भेजने के कुछ समय बाद खाते में ज्योति कुमारी के नाम से 30 हजार रुपए आए। आरोपियों को 200 रुपए कमीशन काटकर शेष राशि नकद दे दी गई। इसके बाद सुशीला के नाम से खाते में 50 हजार रुपए और आए। इसमें से कमीशन काटकर आरोपियों को नकद राशि दे दी गई। अगले दिन ई-मित्र संचालक के खाते पर दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा की ओर से होल्ड लग गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि खाते में साइबर धोखाधड़ी की रकम जमा हुई थी। इस पर जवाजा थाने में मामला दर्ज किया गया।मामले की जांच के दौरान डीएसटी और जवाजा थाना पुलिस की टीम ने तीन संदिग्ध युवकों को स्विफ्फट कार में घूमते हुए डिटेन किया। पूछताछ में साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि आरोपी एक एप के माध्यम से विदेशों में बैठे अज्ञात साइबर ठगों के ग्रुप से जुड़े हुए थे और उनके निर्देश पर रकम का लेनदेन करते थे।पुलिस के अनुसार विदेशी साइबर ठग भारतीय लोगों को धमकी, प्रलोभन अथवा विभिन्न तरह के झांसे देकर रकम म्मयूल खातों में जमा करवाते थे। आरोपियों को क्रिप्टो करेंसी के मूल्य पर करीब 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि दिए जाने का लालच दिया जाता था। आरोपी ई-मित्र और पेट्रोल पंप संचालकों से क्यूआर कोड लेकर उनके खातों में ठगी की रकम डलवाते और कमीशन काटकर नकदी ले जाते थे। साइबर ठगी की शिकायत होने के बाद संबंधित बैंक खाते पर होल्ड लग जाता था। ऐसे में खाताधारक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता था। एक ओर खाते में आई रकम वापस जाने की स्थिति बनती थी, वहीं दूसरी ओर बैंक खाता भी होल्ड हो जाता था।पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों द्वारा ठगी से प्राप्त नकदी का इस्तेमाल क्रिप्टो करेंसी यूएसडीटी खरीदने में किया जाता था। इसके बाद यूएसडीटी को डिजिटल माध्यम से विदेशों में बैठे साइबर ठगों को भेज दिया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इसी माध्यम से साइबर अपराध से अर्जित रकम को विदेश भेजने तथा हवाला कारोबार में खपाने का काम किया जा रहा था।पुलिस ने मामले में राजवीर सिंह चौहान उर्फ रोहित, रितिक मण्डोलिया, तिलोक रेगर तथा चिराग मूलचंदानी को गिरफ्फतार किया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों, क्रिप्टो लेनदेन और विदेश में बैठे साइबर ठगों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।कार्रवाई में जवाजा थाना अधिकारी नवल किशोर, जिला स्पेशल टीम प्रभारी राजदीपेन्द्र सिंह, रामजस, सरफराज मोहम्ममद, जितेन्द्र सिंह सहित डीएसटी, साइबर सेल एवं जवाजा थाना पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे
साइबर ठगी के नेटवर्क से जुडे गिरोह का पुलिस ने किया भंडाफोड
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