प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 से 12 दिसंबर को आधिकारिक दौरे पर कनाडा जाएंगे। करीब एक दशक के अंतराल के बाद हो रहे इस द्विपक्षीय दौरे का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना है। यात्रा के दौरान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाने को लेकर उच्च स्तर पर बातचीत तय है।
व्यापार लक्ष्य और CEPA समझौता
नई दिल्ली और ओटावा का साझा लक्ष्य है कि साल 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार को बढ़ाकर 7 लाख करोड़ रुपए सालाना किया जाए। वर्तमान में दोनों मुल्कों के बीच लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का व्यापार होता है।
इस यात्रा के दौरान CEPA पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। इस समझौते के जरिए दोनों देश निवेश, कारोबार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नए नियम तय करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब वाशिंगटन और ओटावा के बीच व्यापारिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन के टैरिफ दबाव के बीच कनाडाई सरकार नए आर्थिक बाजार तलाश रही है।
फोन पर हुई थी उच्च स्तरीय चर्चा
इस यात्रा की रूपरेखा पिछले महीने तैयार हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और जनसंपर्क बढ़ाने के मुद्दों पर सहमति जताई थी।
कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों पक्ष चाहते हैं कि लंबित व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द से जल्द निष्कर्ष तक पहुंचे। इसके अलावा, बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों पर भी चर्चा हुई थी।
2023 के तनाव के बाद रिश्तों में सुधार
दोनों देशों के राजनयिक संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। साल 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच कड़वाहट आ गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय एजेंटों पर इस घटना में संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था।
इसके बाद 2024 में कनाडाई प्रशासन ने भारतीय राजनयिकों पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके जवाब में दोनों देशों ने एक-दूसरे के छह-छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था, जिससे संबंध निचले स्तर पर पहुंच गए थे।
हालांकि, मार्क कार्नी के सत्ता संभालने के बाद से रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हुई हैं। पिछले साल नवंबर में भारत यात्रा के दौरान कार्नी ने भारत को एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार करार दिया था।
11 साल बाद पहला पूर्ण द्विपक्षीय दौरा
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले अप्रैल 2015 में कनाडा के द्विपक्षीय दौरे पर गए थे, जब वहां स्टीफन हार्पर प्रधानमंत्री थे। उस यात्रा के दौरान भारत ने कनाडा से यूरेनियम आयात करने का महत्वपूर्ण समझौता किया था।
इसके बाद जून 2025 में पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कनाडा की यात्रा की थी, लेकिन वह पूर्ण द्विपक्षीय दौरा नहीं था। इस बार हो रही आधिकारिक यात्रा को दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग की बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
