एपल के नए फोल्डेबल स्मार्टफोन 'आईफोन डुओ' (iPhone Duo) की कीमतें बाजार में आते ही चर्चा का विषय बन गई हैं। टेकआर्क (TechARC) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रीमियम डिवाइस अमेरिका जैसे विकसित देशों की तुलना में भारत, फिलीपींस और तुर्की जैसे विकासशील देशों में значительно अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। शोध के अनुसार, कम आय वाले देशों के ग्राहकों को इस फोन के लिए औसतन 63 प्रतिशत अधिक रकम चुकानी पड़ रही है।
14 देशों के बाजारों का तुलनात्मक अध्ययन
टेकआर्क ने अपने शोध में भारत समेत आठ विकासशील और छह विकसित बाजारों की कीमतों का विश्लेषण किया है। आंकड़ों के मुताबिक, कम और मध्यम आय वाले देशों में आईफोन डुओ की औसत कीमत 3,669 डॉलर (लगभग 3.10 लाख रुपये) है। इसके विपरीत, अमेरिका, यूएई, हांगकांग, कनाडा, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे अमीर देशों में इस फोन की औसत कीमत महज 2,248 डॉलर है।
कम क्रय शक्ति होने के बावजूद विकासशील देशों के खरीदारों को इस डिवाइस के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है। इस सूची में तुर्किये सबसे महंगा बाजार साबित हुआ है, जहां आईफोन डुओ 4,741 डॉलर में बिक रहा है। इसके बाद फिलीपींस का स्थान है, जहां इसकी कीमत 4,519 डॉलर दर्ज की गई है। तुर्किये में स्थानीय मुद्रा में गिरावट और लग्जरी इलेक्ट्रॉनिक्स पर लगने वाले भारी-भरकम कर इसके मुख्य कारण हैं। वहीं, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों में यह फोन 2,950 डॉलर से 3,590 डॉलर के दायरे में उपलब्ध है।
अमेरिका में सबसे सस्ता, बिना आयात शुल्क का फायदा
दूसरी ओर, अमेरिका में आईफोन डुओ सबसे कम यानी मात्र 1,999 डॉलर की शुरुआती कीमत पर मिल रहा है। जानकारों के अनुसार, अमेरिका एपल का घरेलू बाजार होने के कारण वहां किसी तरह का आयात शुल्क नहीं लगता है। साथ ही, डॉलर की मजबूती भी वहां कीमतें नियंत्रित रखने में सहायक होती है। इसके उलट, विकासशील देशों में आयात शुल्क, स्थानीय कर और मुद्रा की कमजोरी डिवाइस के दाम आसमान पर पहुंचा रही है।
भारत में क्यों इतनी ज्यादा है कीमत?
भारत के बाजार में आईफोन डुओ के महंगे होने के पीछे कई प्रशासनिक और व्यावसायिक कारण जुड़े हैं:
- कस्टम ड्यूटी: आईफोन डुओ का स्थानीय स्तर पर उत्पादन नहीं होने के कारण इसे पूरी तरह आयात किया जाता है। इस पर करीब 15 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी और अन्य सरचार्ज लगते हैं।
- जीएसटी: भारत में स्मार्टफोन्स पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू है, जो डिवाइस के बेस प्राइस में जुड़कर अंतिम कीमत को काफी बढ़ा देता है।
- मार्जिन्स और रिस्क कवर: रुपये के मुकाबले डॉलर में उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचने के लिए कंपनी अपना अतिरिक्त बफर मार्जिन भी इसमें शामिल करती है।
- प्रीमियम ब्रांडिंग: भारत में आईफोन को एक लग्जरी और सामाजिक रुतबे का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रीमियम डिमांड का लाभ उठाते हुए कंपनियां ऊंची कीमत तय करती हैं।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इसके पीछे एपल की सोची-समझी व्यावसायिक रणनीति काम कर रही है। कंपनी यह जानती है कि विकासशील देश आईफोन डुओ के मुख्य वॉल्यूम बाजार नहीं हैं, इसलिए वह केवल उन विशिष्ट खरीदारों को लक्षित कर रही है जो भारी कीमत चुकाने में सक्षम हैं। यह रणनीति फोल्डेबल फोन सेगमेंट में इसे सैमसंग जैसे प्रतिद्वंद्वी ब्रांड्स से अलग और अधिक विशिष्ट दर्जे पर स्थापित करती है।
