भरतपुर नगर निगम चुनाव में जीत का दावा कर रही बीजेपी के सामने अपनों की नाराजगी बड़ी चुनौती बन गई है। टिकट वितरण के बाद शुरू हुआ असंतोष अब मंडल अध्यक्षों से लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष तक पहुंच गया है। पार्टी से जुड़े कई पदाधिकारी और नेता आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतर चुके हैं।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष और मंडल अध्यक्षों ने ठोकी ताल
पार्टी के भीतर असंतोष का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष कपिल फौजदार ने पार्टी से बगावत कर चुनावी ताल ठोक दी है। खास बात यह है कि फौजदार परिवार से तीन सदस्य निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
संगठन स्तर पर भी बगावत साफ नजर आ रही है। मंडल अध्यक्ष रहे चंद्रवीर जघीना और संजीव शर्मा भी बीजेपी प्रत्याशियों के सामने चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा शहर मंडल मोर्चे की अध्यक्ष रहीं वीरमति, पूर्व उपाध्यक्ष सुरजीत सिंह, और दीनदयाल उपाध्याय मंडल के महामंत्री रहे चंद्रशेखर कटारा भी निर्दलीय उतर चुके हैं।
संगठन की कार्रवाई और बागी नेताओं के आरोप
पार्टी ने बागी नेताओं पर एक्शन लेते हुए दो मंडल अध्यक्षों को नोटिस जारी किया है, जिसके बाद अंदरूनी घमासान और तेज हो गया है। हालांकि जिन पदाधिकारियों को नोटिस मिला है, उनका कहना है कि उन्हें अभी तक किसी प्रकार का लिखित नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है।
बागी नेताओं का आरोप है कि संगठन ने जमीन से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर धन बल रखने वाले चेहरों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस स्थिति का खामियाजा पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
बीजेपी जिलाध्यक्ष का पक्ष
विवाद बढ़ने के बाद पार्टी नेतृत्व ने सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। बीजेपी जिलाध्यक्ष शिवानी दायमा ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया- "जो भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता बगावत कर चुनाव लड़ रहे हैं, उनकी सूची प्रदेश कार्यालय से मांगी गई थी, जो उपलब्ध करा दी गई है। ऐसे करीब सात-आठ लोग हैं, जिन्हें उनके दायित्वों से मुक्त कर नए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।"
प्रचार के अंतिम दौर में अब बीजेपी के सामने विपक्षी दलों से ज्यादा अपने घर के असंतोष को शांत करने और बागी नेताओं के प्रभाव को सीमित करने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
