शहडोल के बुढ़ार क्षेत्र स्थित शारदा ओपन कास्ट माइंस में हो रही ब्लास्टिंग को लेकर स्थानीय वार्डवासियों का विरोध अब तेज हो गया है। वार्ड पार्षद ने पहले ही SECL प्रबंधन को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण आसपास के मकानों में दरारें आ रही हैं और कई घरों की स्थिति जर्जर होती जा रही है।मामले को लेकर वार्डवासियों ने धरना दिया, जिसके बाद प्रशासन, कॉलरी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच चर्चा हुई। इसके बाद SECL की ओर से जारी पत्र में आगामी एक सप्ताह तक ब्लास्टिंग का कार्य रोककर प्रभावित घरों का सर्वे कराने की बात कही गई है। वहीं जब हमारी टीम ने इस पूरे मामले में SECL प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की तो अधिकारी कैमरे के सामने आने से बचते नजर आए।
समाधान की मांग कर रहे
ये तस्वीरें उस पत्र की हैं, जो नगर परिषद बुढ़ार के वार्ड क्रमांक 3 के पार्षद रामशरण चौधरी ने शारदा ओपन कास्ट माइंस के प्रबंधन को लिखा था।
पत्र में कहा गया कि क्षेत्र में लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण वार्डवासियों के मकानों पर असर पड़ रहा है। शिकायत के मुताबिक कई घरों में दरारें आई हैं और कुछ मकानों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।पार्षद ने पत्र के माध्यम से प्रबंधन को चेतावनी दी थी कि यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो प्रभावित लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
धरने पर बैठे लोग
इसी मुद्दे को लेकर प्रभावित वार्डवासी शारदा ओपन कास्ट माइंस क्षेत्र में धरने पर बैठ गए।लोगों का कहना है कि कोयला उत्खनन के लिए होने वाली ब्लास्टिंग का असर उनके घरों तक महसूस किया जा रहा है। वार्डवासियों का आरोप है कि कंपन से दीवारों और मकानों में दरारें आ रही हैं और उन्हें अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।धरने के बाद प्रशासन, कॉलरी प्रबंधन और प्रभावित लोगों के बीच बातचीत हुई।
प्रभावित घरों का होगा सर्वे
धरने और बातचीत के बाद SECL की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि 12 सितंबर 2026 को ग्राम के वार्डवासियों, प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन के बीच बनी सहमति के आधार पर आगामी एक सप्ताह तक ब्लास्टिंग का कार्य रोककर प्रभावित घरों का सर्वे किया जाएगा।यानी अब सवाल यह है कि सर्वे में कितने घर प्रभावित पाए जाते हैं और जिन लोगों के मकानों में दरार आने का आरोप है, उन्हें राहत और मुआवजा कब तक मिलता है।
SECL का पक्ष जानने पहुंचे, कैमरे से बचते नजर आए
इस पूरे मामले में जब हमारी टीम ने SECL प्रबंधन से सवाल करने और उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो अधिकारी कैमरे के सामने आने से बचते नजर आए।
वार्डवासियों का कहना है कि यह केवल मकानों में आई दरारों का मामला नहीं है, बल्कि उनके परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
अब एक सप्ताह तक ब्लास्टिंग रोककर होने वाला सर्वे ही तय करेगा कि ब्लास्टिंग के असर को लेकर वार्डवासियों की शिकायतों में कितना नुकसान सामने आता है और जिम्मेदारी तय होने के बाद प्रभावित परिवारों को क्या राहत मिलती है।
