नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कूटनीतिक सत्रों के बीच मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सोशल मीडिया पोस्ट में इस्तेमाल किए गए बॉलीवुड गाने सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। सम्मेलन से जुड़ी अपनी हर पोस्ट के साथ उन्होंने अलग-अलग हिंदी फिल्मों के सदाबहार गीतों को जोड़ा, जिसे कूटनीति के मोर्चे पर एक अनूठे संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
भारत मंडपम से लेकर रूस और ईरान के नेताओं तक बॉलीवुड गानों का इस्तेमाल
भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वागत किए जाने वाले वीडियो पर मलेशियाई पीएम ने फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' का मशहूर गाना 'तुझे देखा तो ये जाना सनम' लगाया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक अन्य तस्वीर के लिए उन्होंने 'दिल तो पागल है' फिल्म के टाइटल ट्रैक को चुना। ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते अपनी तस्वीरों के साथ साल 2000 की फिल्म 'हर दिल जो प्यार करेगा' का टाइटल ट्रैक शेयर किया।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ अपनी बैठक की पोस्ट के लिए उन्होंने साल 1957 की क्लासिक फिल्म 'नया दौर' का गाना 'साथी हाथ बढ़ाना' चुना, जो एकजुटता का संदेश देता है। वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तस्वीर पर फिल्म 'लगान' का प्रेरणादायक गीत 'चले चलो' लगाया गया। भारत से विदाई के शॉर्ट्स में उन्होंने फिल्म 'लक्ष्य' के गाने 'कंधों से मिलते हैं कंधे' को चुना।
राहुल और प्रियंका गांधी से मुलाकात पर 'वीर-साहारा' का गीत
अपनी भारत यात्रा के दौरान अनवर इब्राहिम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से भी मुलाकात की थी। विपक्षी नेताओं के साथ भोज की तस्वीरों को शेयर करते हुए उन्होंने यश चोपड़ा की फिल्म 'वीर-ज़ाारा' का गाना 'ऐसा देस है मेरा' चुना, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को रेखांकित करता है।
मलेशियाई प्रधानमंत्री अकेले ऐसे नेता नहीं थे जिन्होंने कूटनीतिक संदेश देने के लिए भारतीय संगीत का सहारा लिया। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की यात्रा के दौरान वहां के विदेश मंत्री सुगियोनो ने भी अपनी इंस्टाग्राम रील्स में फिल्म 'दिल धड़कने Do' के संगीत का इस्तेमाल किया, जिसे सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताई सम्मेलन की सफलता
दूसरी ओर, भारत ने विभाजित वैश्विक परिदृश्य के बीच आयोजित इस ब्रिक्स सम्मेलन को बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सम्मेलन की सफलता पर बात करते हुए बताया कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब दुनिया दो बड़े संघर्षों और मजबूत मतभेदों के बीच बंटी हुई थी।
विदेश मंत्री के मुताबिक, पश्चिम एशिया का संघर्ष इस दौरान सबसे कठिन मुद्दा था, लेकिन इसके बावजूद सभी देशों ने एक साझा बयान पर सहमति बनाई। सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया, जिसमें 11 ब्रिक्स सदस्य देश, 10 पार्टनर देश, चार क्षेत्रीय निकाय और सात अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल रहे।
