गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने सपा के पीडीए (PDA) नारे पर तंज कसते हुए कहा कि सपा को देखकर आज गिरगिट भी खुश हो रहा होगा, क्योंकि उसे अपने मुकाबले का एक बड़ा कंपटीटर मिल गया है।
कार्यक्रम में करीब 12 हजार शिक्षक और मतदाता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस दौरान भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के पक्ष में मतदान करने की जोरदार अपील की। उन्होंने कहा कि आगामी 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के दिन माध्यमिक शिक्षा से जुड़े मतदाताओं के लिए अवकाश भी घोषित किया गया है, ताकि शिक्षक बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
राज्यसभा चुनाव और 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' पर वार
सपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने राज्यसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 10 सीटों पर हुए चुनाव में सपा ने सिर्फ दो प्रत्याशी उतारे थे। एक प्रत्याशी ‘चाचा जान’ यानी परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी का हिस्सा थे और दूसरे मुंबई के धन्नासेठ यानी ‘पराया धन अपना’ थे।
योगी ने आगे कहा कि यदि सपा यह उपदेश दे कि उसके कार्यकाल में सुरक्षा और शांति थी, तो यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई मगरमच्छ तट पर बैठकर यह उपदेश दे कि उसने शिकार करना छोड़ दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि शिक्षा और समाजवादी पार्टी नदी के दो ऐसे छोर हैं जो कभी एक-दूसरे से नहीं मिल सकते, क्योंकि सपा हमेशा से शिक्षा की विरोधी रही है।
2017 से पहले था पहचान का संकट, अब सुरक्षित माहौल
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बात करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का बड़ा संकट था, जिसकी वजह से राज्य में निवेश भी नहीं आ पाता था। आज स्थिति बदल चुकी है और यूपी में चौतरफा निवेश और विकास हो रहा है।
उन्होंने शारदीय नवरात्र के पहले दिन का जिक्र करते हुए कहा कि आज राज्य में ऐसा सुरक्षित माहौल है कि लोग अपने परिवारों के साथ मंदिरों में दर्शन करने पहुंच रहे हैं। सुबह 6 बजे तक विंध्यवासिनी मंदिर में एक लाख और देवीपाटन मंदिर में 50 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। उन्होंने कहा कि पहले के समय में त्योहारों से ठीक पहले उपद्रव शुरू हो जाते थे और अराजकता के कारण प्रदेश की छवि धूमिल होती थी।
एनपीएस और कर्मचारियों के हक पर प्रहार
पूर्व की अखिलेश सरकार पर निशाना साधते हुए सीएम ने पेंशन योजना का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि मुलायम सिंह यादव की सरकार ने 2005 में न्यू पेंशन स्कीम (NPS) लागू की थी, जिसके तहत सरकार और कर्मचारी दोनों को 10-10 प्रतिशत अंशदान देना था।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा सरकार ने कर्मचारियों के बैंक खाते तक नहीं खुलवाए थे। इसके बाद 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद 2019 में अलग से 10 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई और कर्मचारियों के खाते खुलवाकर पैसे जमा कराए गए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अंशदान को दबाकर रखना उनके साथ सीधा धोखा था। साथ ही आरोप लगाया कि उस दौर में सरकारी आयोगों में केवल रिश्तेदारों को नौकरियां दी जाती थीं और सैफई सिंडिकेट के लोग अराजकता फैलाते थे।
