रीवा का संजय गांधी अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है... यहां एक मरीज को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद मरीज की सांसें चलती मिलीं और उसे दोबारा इलाज के लिए गंभीर रोगी वार्ड में भर्ती किया गया। मामला सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और मेडिकल प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मेडिसिन विशेषज्ञ इसे बेहद दुर्लभ स्थिति बता रहे हैं।
मामला हैरान करने वाला
रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में सामने आया यह मामला जितना हैरान करने वाला है, उतना ही मेडिकल तौर पर असामान्य भी...सीधी निवासी करीब 80 वर्षीय गिरिजा गुप्ता को गंभीर हालत में रेफर किए जाने के बाद 4 सितंबर को संजय गांधी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था।इलाज के दौरान जूनियर डॉक्टर ने मरीज का चेकअप किया। जांच के दौरान सांसें नहीं चलने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।इसके बाद मिले दस्तावेजों के मुताबिक मरीज को मृत घोषित किए जाने की प्रक्रिया पूरी की गई। लेकिन अगले दिन यानी 5 सितंबर को वही मरीज दोबारा जीवित अवस्था में मिला, जिसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और उसे गंभीर रोगी वार्ड में फिर से इलाज के लिए भर्ती किया गया।
सांसे कैसे चलने लगी
अब इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर मरीज को किस आधार पर मृत घोषित किया गया और बाद में उसकी सांसें कैसे चलने लगीं?डॉक्टर पीके बघेल के मुताबिक इस तरह के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। खासतौर पर 80 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों में ऐसी स्थिति सामने आने की संभावना बताई जाती है। डॉक्टर का कहना है कि देश में इस तरह के कई रेयर केस सामने आ चुके हैं।फिलहाल गिरिजा गुप्ता की हालत गंभीर बनी हुई है और संजय गांधी अस्पताल के गंभीर रोगी वार्ड में उनका इलाज जारी है।
हालांकि यह मामला मेडिकल तौर पर कितना दुर्लभ है और मरीज को मृत घोषित करने की प्रक्रिया में क्या हुआ, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।एक तरफ अस्पताल प्रबंधन इसे रेयर मेडिकल केस बता रहा है, तो दूसरी तरफ मरीज को मृत घोषित किए जाने और फिर जीवित पाए जाने की घटना ने अस्पताल की मेडिकल जांच प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
